मावा-पनीर, घी-तेल, मसाले नकली मिल ही चुके, रंगों में भी मिलावट; जांच तक नहीं होती

मीनाक्षी पारीक 

जयपुर . पनीर, दाल, दूध, तेल, घी में मिलावट के दौर के बीच रंगों में भी मिलावट का खतरा बना हुआ है। त्यौहार पर रंग सीधे शरीर पर लगते हैं, ऐसे में नुकसान अधिक होने का डर रहता है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर बार होली के त्यौहार के बाद एलर्जी और स्किन डिजीज के मरीज लगभग दोगुना हो जाते हैं। तय है कि रंगों में ऐसी मिलावट है जो स्किन को नुकसान करती है। लेकिन ताज्जुब की बात यह कि रंगों में मिलावट की कभी जांच ही नहीं की गई। ड्रग विभाग की ओर से रंगों की जांच की जा सकती है कि उनमें कोई हानिकारक रंग मिलाए गए हैं या नहीं। लेकिन जांच नहीं होने से यह भी पता नहीं चल पाता कि गुलाल हो या रंग, मिलावट क्या है।होली पर अस्थमा व एलर्जी से पीड़ित मरीज रंग, गुलाल व अन्य प्रकार के कलर के संपर्क में आने पर परेशानी में आ जाते हैं। एलर्जी और अस्थमा विशेषज्ञ डॉ. शुभ्रांषु और डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि कई बार रंग, गुलाल, अबीर व अन्य पदार्थों में हानिकारक केमिकल होते है जो त्वचा को नुकसान तो पहुंचाते ही हैं, अस्थमा को भी बढ़ाते हैं। डॉ. अंशु सहाय बताते हैं कि रंगों में कई घातक केमिकल होते हैं। होली खेलते वक्त आंखों में जरा सा जाते ही उसे खराब कर देते हैं। कई बार रंग जाने पर आंख मसल लेते हैं, इससे केमिकल अंदर तक चला जाता है।