23 महीने बाद डीएलएस कॉलेज को मान्यता, 1500 छात्रों को मिलेगा फायदा

पार्थो चक्रवर्ती 

बिलासपुर. अटल यूनिवर्सिटी और डीएलएस कॉलेज का विवाद 23 महीने बाद सुलझ गया है। अब नए सत्र से डीएलएस कॉलेज में 1500 छात्रों को सुविधा मिलेगी। नैक से बी ग्रेड प्राप्त डीएलएस कॉलेज में छात्र नए सत्र से एडमिशन ले सकेंगे। नए प्राचार्य की भर्ती करने के बाद यूनिवर्सिटी ने डीएलएस कॉलेज की मान्यता बहाल की है। 7 फरवरी 2019 यूनिवर्सिटी में हुई कार्यपरिषद की बैठक में डीएलएस और पीडी महंत कॉलेज को प्राचार्य की भर्ती करने के बाद सत्र 2019-20 में स्नातक, स्नात्कोतर और डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लेने की अनुमति दी गई थी। अटल यूनिवर्सिटी से संबद्ध 179 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में इस वर्ष रेगुलर और प्राइवेट 1 लाख 62 हजार 432 छात्रों ने एडमिशन लिया है। इसमें इस सत्र में डीएलएस कॉलेज में एडमिशन नहीं हुआ था। इस वजह से छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। वहीं कॉलेज और यूनिवर्सिटी की गलती के कारण कई छात्रों का साल भी बर्बाद हुआ था। जिस मामले को लेकर लड़ाई शुरू हुई थी, उस मामले में कॉलेज को बी ग्रेड मिला। इसके बाद भी यूनिवर्सिटी ने कॉलेज की मान्यता रोक कर रखी। यहां तक कि डीएलएस कॉलेज ने नए प्राचार्य के लिए साक्षात्कार भी कराया, लेकिन यूनिवर्सिटी ने प्राचार्य का नियुक्त पत्र नहीं दिया। अब 40 दिन बाद यूनिवर्सिटी ने नए प्राचार्य डॉ. रंजना चतुर्वेदी को नियुक्ति देकर कॉलेज की मान्यता बहाल की है। अब सरकंडा क्षेत्र सहित अन्य गांवों से आने वाले छात्रों को डीएलएस कॉलेज की शिक्षकों का ज्ञान, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, प्रैक्टिकल लैब, खेल ग्राउंड सहित सुविधाओं का फायदा मिलेगा।