भू-जल दोहन ऐसे ही रहा तो पानी के लिए मच सकती है हायतौबा

गणेश योगी 

सरकार ने करीब डेढ-दो दशक से गिरते भू-जल स्तर को लेकर पानी को बचाने व उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए जल है तो जीवन है, जल है तो कल जैसे कई स्लोगन देकर लोगों को कई कार्यक्रमों के माध्यम से जागरुक किया था, लेकिन समय के साथ-साथ ये स्लोगन व जागरुकता कार्यक्रम कागजों में सिमट कर रह गया। इस पर गंभीर कोई नहीं है। सरकारी मशीनरी जहां पानी के दुरपयोग रोकने के लिए कोई बडा कदम नहीं उठा रही है तो लोग भी इसके अतिदोहन करने से नहीं चूक रहे है। पानी की महत्ता को लेकर 22 मार्च को मनाए जाने को लेकर विश्व जल दिवस घोषित कर रखा है, लेकिन यह भी कागजों में सिमट कर रह गया है। जल दिवस पर शुक्रवार को लोगों को पानी के सदुपयोग को लेकर जागरुक करने के लिए कोई कार्यक्रम नहीं रखा गया। जल संकट से उबरना जिले में प्रशासन से लेकर जलदाय विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे में आने दिनों में पानी का अतिदोहन ऐसे ही होता रहा और बारिश भी कम होती रही तो जिले में पानी को लेकर बडा संकट खडा हो जाएगा।

निवाई,मालपुरा, उनियारा अतिदोहित क्षेत्र

भू-जल वैज्ञानिक लक्ष्मण मीणा ने बताया कि जिला डार्क जोन में है। इसमें भी निवाई, मालपुरा, उनियारा अतिदोहित क्षेत्र घोषित हो चुके है। इन तीनों ब्लॉकों में लोग पानी को उसकी रिचार्ज की क्षमता से अधिक निकाल रहे है। दो साल बारिश कम होने से भू-जल स्तर में गिरावट होती जा रही है।

टोंक, देवली, टोडारायसिंह सुरक्षित जोन में

भू-जल वैज्ञानिक लक्ष्मण मीणा ने बताया कि पानी की दृष्टि से जिला छह ब्लॉक में बंटा हुआ है। इसमें टोंक, देवली, टोडारायसिंह ब्लॉक का पानी पीने योग्य नहीं होने से लोग उसका दोहन रिचार्ज होने की क्षमता से दोहन कम कर रहे है। इसके चलते ये तीनों ब्लॉक सुरक्षित जोन में है।

बीसलपुर में पानी की स्थिति चिंताजनक

जिले ही नहीं प्रदेश भर के बडे बांधों में शुमार बीसलपुर बांध में पानी की स्थिति काफी चिंताजनक है। बीसलपुर बांध के एईएन मनीष कुमार ने बताया कि वर्तमान में बांध की कुल भराव क्षमता 39.70 टीएमएसी है। दो सेंटीमीटर पानी टोंक के विभिन्न हिस्सों के अलावा अजमेेर व जयपुर में जा रहा है।