गर्भपात कराने आई महिला अंबेडकर अस्पताल में बच्चा खरीद-फरोख्त गिरोह के चंगुल में फंसी; 50 हजार में बेचा

नीलू सोनी 

रायपुर. प्रदेश के सबसे बड़े अंबेडकर अस्पताल में नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त करने वाला गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। ये गिरोह गरीब और मजबूर परिवारों को 50-50 हजार रुपए का लालच देकर बच्चा बेचने को मजबूर करता है। पुलिस ने रविवार को एक बच्चे की मां के साथ-साथ दो महिला दलाल और खरीदने वाले सराईपाली के कारोबारी व उसके साले को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस को शक है कि अंबेडकर अस्पताल में नवजात बच्चों को बेचने खरीदने वाला रैकेट लंबे अर्से से काम कर रहा है। पुलिस ने रैकेट में पर्दे के पीछे काम करने वालों की खोजबीन शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बलौदाबाजार पलारी निवासी महिला ईश्वरी चेलक के तीन बच्चे हैं। वह चौथी को पालने में असमर्थ में थी। इस वजह से वह दलालों के चंगुल में फंस गई। ईश्वरी 2 मार्च को गर्भपात करवाने आई थी। डाक्टरों के सामने जब उसने गर्भपात करवाने की इच्छा जाहिर की। डाक्टरों ने उसे बताया कि नौवें महीने में गर्भपात किसी भी सूरत में संभव नहीं है। इसके बावजूद वह गर्भपात करवाने पर अड़ी थी। अपनी जिद में वह अस्पताल में घूम रही थी। वहीं ईश्वरी की मुलाकात टाटीबंध की ममता गोस्वामी से हुई। वह खुद को समाज सेविका बताती है, लेकिन उसकी आड़ में बच्चों की खरीदी बिक्री में दलाली करती है। वह ईश्वरी को अपने साथ ले गई। उसने उसे अपने घर पर बर्तन झाड़ू के काम में रख लिया।

उसने 7 मार्च को ईश्वरी को अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसने एक लड़की को जन्म दिया। उसके बाद ममता ने समता कॉलाेनी की रुपा सिंह राठौर से मिलकर बच्चे को बेचने के लिए ग्राहक तलाश करने को कहा। रुपा की चश्मा दुकान है। रुपा ने अपने परिचित अनाज ब्रोकर संजय गणात्रा से संपर्क किया। गणात्रा ने कई लोगों को बताया कि अगर उनके परिचित में कोई बच्ची गोद लेना चाहता है, तो उसे बताएं। इस बीच उसने अपने जीजा भूपेश माखीजा को भी फोन लगाया। माखीजा का सरायपाली में कपड़े की दुकान है। उनका एक बच्चा था, जिसकी 11 साल पहले मौत हो गई। तब से वे नि: संतान थे। वे बच्चे को रखने के लिए राजी हो गए।

एेसे फूटा भांडा  काउंसिलिंग के दौरान  मां ने बता दी  सच्चाई :  20 मार्च को ईश्वरी अपने पति रामनाथ के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और मारपीट की शिकायत दर्ज कराने महिला थाने पहुंची। पुलिस ने काउंसिलिंग के बाद महिला को सखी सेंटर भेज दिया। यहां महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने 22 मार्च को उसकी काउंसिलिंग की। इसी दौरान ईश्वरी ने बच्ची को बेचने वाली बात बता दी। अधिकारी भी सुनकर सकते में आ गए। उन्होंने रायपुर एसएसपी को इसकी जानकारी दी। शनिवार रात मौदहापारा पुलिस ने सरायपाली, टाटीबंद, समता कालोनी और खमतरई में छापा मारकर सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर  लिया। सभी के खिलाफ केस दर्ज कर और जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी अपना मुंह नहीं खोल रहे हैं।

अस्पताल के वार्ड में ही हुआ लेन-देन : सात मार्च को ईश्वरी ने शिशु को जन्म दिया। नौ मार्च को अस्पताल के वार्ड में पैसों का लेन-देन हुआ। इसके बाद यहीं  से दो दिन के नवजात को लेकर माखीजा चला। ईश्वरी की भी अस्पताल से छुट्टी हो गई। लेन-देन के बाद ईश्वरी को 50 हजार रुपए मिले, लेकिन दलालों को कितने रुपए मिले, इसका खुलासा अब तक नहीं हुआ है। पुलिस इसकी जांच कर रही है।