13 साल में महज 6 गांवाें को मिली खारे पानी से निजात, 50 गांव के लोग आज भी परेशान

आरती शर्मा 

गोहद जनपद पंचायत गोहद के आधा सैकड़ा से अधिक गांव आज भी खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इन गांवों में वर्ष 2006 में शासन ने पीएचई के माध्यम से 50 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री नल-जल योजना की शुरुआत की थी। इसके साथ ही खारे पानी के शुद्धीकरण को लेकर फिल्टर प्लांट स्वीकृत किए गए थे। लेकिन 13 साल गुजर जाने के बाद महज सर्वा, देहगांव, केशवपुरा, अंसौली, महुरी और हरनामपुरा गांव के लोगों को मीठा पानी नसीब हो सका है। अब बाकी गांवों से मांग उठने लगी है कि करोड़ों रुपए पानी पर खर्च किए गए फिर भी पानी का संकट बरकरार क्यों है। इतना ही नहीं कुछ गांव तो ऐसे भी हैं जहां के ग्रामीण दो से तीन किमी तक पैदल चलकर ट्यूबवेल व तालाबों से पानी भरने के लिए जाते हैं।

इन गांवों में पीएचई विभाग के अधिकारी कभी झांकने तक नहीं पहुंचते हैं। इस संबंध में जब पीएचई विभाग के ईई दाताराम जर्मन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पुरानी योजनाएं फेल होने के बाद 34 नई योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। जिनमें खारे पानी का शुद्धीकरण किया जाना है।

कागजों में दफन हो गईं योजनाएं

शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वीकृत पेयजल योजनाएं धरातल की बजाय कागजों में दफन होकर रह गई हैं। राजनेताओं ने भूमि पूजन व उद्घाटन कर इन योजनाओं की शुरुआत की थी। लेकिन स्थिति पर गौर करें तो कहीं बोर खराब है तो कहीं पानी की पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। खास बात यह है कि अधिकारियों ने लाखों रुपए खर्च करके गांवों में योजना का कार्य पूरा कर लिया, उसके बाद इसे फैल करार दे दिया। आज भी इन गांवों में खारे पानी की दास्तान ऐसी है कि गांवों के लोग मीठे पानी की तलाश में कोसों दूर बर्तन लेकर भटकते हैं। किसी गांव में अगर सौभाग्य से कुआं या हैंडपंप में मीठा पानी निकल आए तो पूरा गांव व्याकुल हो जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार मीठा पानी कुओं से निकला है, लेकिन कुछ समय पश्चात वह भी खारा हो गया।