लोकसभा चुनाव: बिहार का मधेपुरा बना हॉट-हॉट, लालू यादव की लड़ाई लड़ रहे शरद

अनुज श्रीवास्तव 

पटना  मधेपुरा लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार का हॉट-हॉट सीट बन गया। मधेपुरा में एक कठिन लड़ाई में घिरे शरद यादव को भी इसका अनुमान नहीं रहा होगा कि चुनावी राजनीति इतनी कठिन हो सकती है। बहरहाल वे इस सीट पर सिमट कर रह गए हैं। कभी जनता दल और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दूसरों की जीत-हार की व्यूह रचना करने वाले शरद के लिए इससे अधिक मजबूरी क्या होगी! हसरत आठवीं बार संसद पहुंचने की है, जबकि राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और दिनेश चंद्र यादव राह रोकने के लिए तैयार। कुछ ऐसे ही त्रिकोणात्मक संघर्ष में पिछली बार शरद धूल धूसरित हुए थे। इस बार इत्मीनान महज इतना कि साथ में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद हैं, जिनसे वे कभी मधेपुरा में जीतते-हारते रहे हैं।मधेपुरा की लड़ाई हकीकत में लालू लड़ रहे। शरद यादव उनके प्रतिनिधि के रूप में मैदान में हैं। यह उसी दिन तय हो गया था, जब शरद यादव महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे में मध्यस्थ की भूमिका में आए थे। संभवत: उन्होंने जार्ज फर्नांडिस की सियासी गति से सबक लिया होगा, इसीलिए वे मैदान में अकेले बूते नहीं उतरे। 2009 में जार्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर में कुछ ऐसी ही मजबूर लड़ाई के लिए अभिशप्त हुए थे। उस हार के बाद वे राजनीतिक परिदृश्य से ही ओझल हो गए। दुर्योग कि सेहत भी बिगड़ती गई। उससे पहले 2004 में मधेपुरा में शरद को शिकस्त देकर लालू रेल मंत्री बने। जार्ज फर्नांडिस अब हमारे बीच नहीं रहे, जिनके साथ मिलकर शरद यादव ने जनता दल (यूनाइटेड) का गठन किया था। पिछली बार इसी पार्टी के टिकट पर शरद यादव 56209 मतों के अंतर से राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव से शिकस्त खा चुके हैं। बाद में उत्तराधिकार का सवाल उठाकर पप्पू यादव राजद से किनारा कर लिए। तब राजग से अलग होकर जदयू अपने बूते मैदान में था। भाजपा उम्मीदवार को मिले 252539 मत शरद यादव की हार के लिए निर्णायक साबित हुए।