जीवंत हो उठा गोर्वधननाथ मंदिर

ब्रेकिग न्यूज
ग्राम कंपेल में जीवंत हौ उठा गोवर्धननाथ मंदीर ,
ग्रामीणो ने जुटाये साढे पांच करोड ,
जन सहयोग से 319, साल पहले बने मंदीर का कराया जीर्णोध्दार ,
शंक संवत 1620, मे उन्हैल के तालाब से मिली थी मुर्ती,
शंक संवत 1622 मे अहिल्याबाई ने बनवाया था मंदीर ,
सन 2013 मे जीर्णोध्दार शुरू ग्रामिणो के जनसहयोग से ,
इन्दोर से ३५,कि,मी दूर नेमावर रोड पर होल्कर राजवंश की राजधानी रहे कंपेल मे देवी अहिल्या बाई द्वारा ३१९ साल पहले बनवाये गये गोवर्धननाथ मंदीर का ग्रामिणो ने पांच करोड रूपयो की लागत से जीर्णोद्धार कराया है ! इस मंदीर मे भगवान गोवर्धननाथ जी की दस भुजाओ वाली दुर्लभ प्रतिमा विराजित है यह मुर्ती उन्हैल के तालाब से साडै तीन सो साल पहले निकली थी ! तब इसे देवी अहिल्या बाई होल्कर ने मंदीर बनवाकर स्थापित करवाया था ! अब ग्रामिणो ने पुराने मंदीर की जगह जिर्णोद्धार कर के 51 फिट उचॉ मंदीर बनवाया है ! इसमे पीतल के कलश ,नक्काशीदार दरवाजै सहित संगमरमर का प्रयोग किया है! राधाक्रष्ण व भोलेनाथ की प्रतिमाओ की भी प्राण प्रतिष्ठा की गयी है ! सभी कार्य कंपेल वासियो के साथ इंदोर व अन्य जगह से सहयोग प्राप्त कर जनसहयोग से किया गया है !
आचार्य संतोष दुबे के अनुसार भगवान क्रष्ण ने महाभारत मे जो दिव्य स्वरूप
अर्जुन को दिखाया था वही स्वरूप मुर्ती मे अंकीत है !
ग्राम उदय पुर से द्वारका दास ,रामदास व परमहंस महाराज कंपेल आये थे ,तब उनके पास द्वारकाधीश भगवान की छोटी मूर्ति थी ! तीनो संत कुटीया बनाकर वही पुजन करने लगे ! ग्रामिणो के अनुसार उन्है स्वप्न अाया की गोवर्धननाथ भगवान की मुर्ति गॉव से तीन किलो मीटर दूर तालाब मे है ! इस पर गॉव के वरिष्ठ सालम सिह व सक्षम पटेल के सहयोग से शंक संवत 1620,तालाब से मुर्ती निकलवाई गयी ! दो साल बाद शंक संवत १६२२, मे अहिल्या बाई होल्कर को जानकारी लगी तो वे दर्शन को वहा आयी ! तब उन्होने मुर्ती को इंदोर के राजबाडा मे स्थापित करने की मंशा जताई लेकिन मुर्ती अपनी जगह से तील भर नही हिली तो वही पर मंदिरनिर्माण कर मुर्ती स्थापित कर दी गयी !
मंदिर के पुजारी पवन बोरासी ने मंदिर की रावजी(भाट) संभालकर रखी गयी है , इस बात का उल्लेख है ! ये मंदीर का इतिहास,
रिपोर्टर शेखर बागवान के साथ,
डिस्ट्रीक ब्यूरो चीफ
सुरेश पिपलोदिया
P K S न्यूज मध्य प्रदेश
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