तेलंगाना के 2 कांसैप्ट,एक पर मोदी, दूसरे पर काम कर रहे राहुल गांधी

 भाजपा ने पी.एम. किसान सम्मान निधि (सालाना 6,000 रुपए) का लाभ अब हर किसान को देने का वायदा अपने संकल्प पत्र में किया है और इसके तहत मोदी सरकार ने 2,000 रुपए की पहली किस्त चिन्हित किए गए काफी किसानों के खातों में जमा भी करवा दी है। यह देश में कोई नई योजना नहीं है। इस तरह की योजना तेलंगाना में टी.आर.एस. सरकार राज्य में पहले ही लागू कर चुकी है। फर्क सिर्फ इतना है कि राज्य सरकार किसानों को चैक के जरिए सालाना 6 की जगह 4,000 रुपए की राशि एकमुश्त मुहैया करवा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में अलग से किसान बजट लाने का वायदा किया है। इस तरह का आइडिया भी तेलंगाना सरकार का ही था। सरकार ने 2017 में अलग से किसान बजट लाने का ऐलान भी कर दिया था। इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान भी कर दिया गया था लेकिन संविधान में प्रावधान नहीं होने के कारण यह संभव नहीं हो सका।

चंद्रशेखर राव ने शुरू की थी रायतु बंधु किसान योजना
पी.एम. किसान सम्मान निधि  के तहत  किसानों को 6,000 रुपए की राशि सालाना दी जाती रहेगी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने इसी तरह की रायतु बंधु  बंधु किसान योजना की 10 मई 2018 को करीमनगर जिले से शुरूआत की थी। इस योजना के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में 12,000 करोड़ रुपए किसानों को आबंटित किए थे। किसानों को खरीफ  और रबी फसल के अनुसार यह आर्थिक सहायता 2 चरणों में दी जाती है। किसानों को चैक के जरिए प्रति एकड़ 4,000 रुपए दिए जाते हैं। यह राशि 8 हजार रुपए सालाना हो सकती है।

योजना के दम पर टी.आर.एस. ने फिर बना ली सरकार
मोदी सरकार और तेलंगाना सरकार की योजना में यह बड़ा अंतर है। किसानों को दी जाने वाली राशि में भी काफी फर्क है। के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टी.आर.एस.) ने राज्य विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान च्रायतु बंधु योजना को अपनी एक बड़ी सफलता के तौर पर पेश किया था। इस योजना की शुरूआत के 6 महीने बाद ही तेलंगाना में चुनाव हुए थे और चंद्रशेखर राव की पार्टी टी.आर.एस. ने इनमें जीत दर्ज की थी।

संविधान में नहीं है अलग विभाग के बजट का प्रावधान
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने किसानों के लिए अलग से बजट देने का ऐलान 2017 में ही कर दिया था। किसानों को बदहाली से बचाने के लिए सरकार वर्ष 2018-19 के लिए अलग कृषि बजट पेश करने वाली थी जबकि संविधान में विभाग आधारित अलग बजट पेश करने का प्रावधान नहीं होने के कारण सरकार को इससे अपने हाथ पीछे खींचने पड़े थे। विधायी प्रक्रिया भी किसी विभाग के लिए अलग बजट की अनुमति नहीं देती है। यही वजह है कि केंद्र में भी रेलवे बजट को आम बजट के साथ ही पेश किया जाता है।

चुनाव प्रचार में दोनों कांसैप्ट भुनाने की कवायद 
भाजपा और कांग्रेस के घोषणा पत्रों में दोनों ही कांसैप्ट हैं। एक पर मोदी और भाजपा काम कर रही है और अलग किसान बजट का वायदा राहुल गांधी जनता में कर ही रहे हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि तेलंगाना में किसानों के लिए शुरू की गई रायतु बंधु  योजना टी.आर.एस. के लिए विधानसभा चुनाव में रामबाण साबित हुई थी और यहां यह भी कहना उचित होगा कि के. चंद्रशेखर राव की अलग से किसान बजट की सोच भी नकारात्मक नहीं थी। बहरहाल इन दोनों कांसैप्ट्स पर पी.एम. मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव प्रचार में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, बाकी जनता को क्या रास आया, यह चुनावी नतीजे ही बताएंगे।