हिमाचल में फिर सामने आया कांग्रेस का शीतयुद्ध

मीनाक्षी भारद्वाज 

शिमला,  लोकसभा चुनाव की रणभूमि सज चुकी है। लेकिन हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भले चुनावी शोर में आंतरिक गुटबाजी को शांत करने का प्रयास किया जा रहा हो परंतु कांग्रेस के शीतयुद्ध की लपटें फिर बाहर दिखना शुरू हो गई हैं।

कांग्रेस पूरे देश में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, हिमाचल में कांग्रेस चुनाव प्रचार धीरे-धीरे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र्र सिंह के आसपास घूम रहा है। यही वजह है कि इस शीतयुद्ध के संबंध में कांग्रेस नेता मुखर होना शुरू हो गए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने यहां तक कह दिया कि पूर्व सीपीएस नीरज भारती कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर नीरज भारती ने पोस्ट अपलोड कर कांग्रेस के बड़े नेताओं को आड़े हाथ ले लिया।
उन्होंने दो दिन पूर्व फेसबुक पर दो पोस्ट अपलोड कर कांग्रेस में फिर तूफान ला दिया है। उन्होंने कांगड़ा के बड़े राष्ट्रीय नेता को भी लपेट कर कांगड़ा संसदीय सीट पर टिकट के लिए क्या-क्या गोटियां फिट हुईं, उसका भी जिक्र किया है। इससे कांग्रेस कितने धड़ों में बंटी है, यह सबके सामने आ गया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के लिए पहले कांगड़ा के राष्ट्रीय नेता जुगाड़ लगा रहे थे। इसके लिए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष को मैनेज करने की कोशिश की गई मगर ऐसा नहीं हुआ। वहीं, धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र की सीट को लेकर क्या-क्या शर्तें कांग्रेस के भीतर हुईं, इनका भी भंडाफोड़ हो गया है। अब यह बात कांग्रेस का बंटाधार कर गई है।
इसके साथ ही कांग्रेस में नया विवाद हो गया है। लेकिन वीरभद्र्र सिंह जिस तरह प्रदेशभर में जनसभाओं में अपने आप को केंद्रित करने की बयानबाजी दे रहे हैं, उससे साफ पता चल रहा है कि पार्टी में गुटबाजी किस तरह हावी है। हमीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ही धुरंधर हैं। हालांकि उस दौरान मंच पर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू भी थे। हमीरपुर संसदीय सीट पर सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा के बेटे अभिषेक राणा की सिफारिश पूर्व मुख्यमंत्री करते रहे हैं।वहीं, भाजपा एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है। लेकिन कांग्रेस की धड़ेबाजी से का डर काफी परेशान है। कांग्रेस के कई धड़े एक मंच पर एकत्रित नहीं हो पा रहे हैं। इसी वजह से कांग्रेस का चुनाव प्रचार अभी जोर नहीं पकड़ रहा है। पार्टी की नुक्कड़ सभाओं में भीड़ न होना भी गुटबाजी की भेंट चढ़ चुका है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कांग्रेस के विभिन्न धड़ों को एक साथ लाने के लिए अभी तक सफल होते नहीं दिख रहे है।