मंडी एवं क्रय केंद्र का हाल तो सुधारे कोई

दीपसिंह 

कासगंज,। वो अन्नदाता हैं। दिन-रात खेतों में मेहनत करते हैं। हर चुनाव में नेताओं की जुबां पर उनका नाम सबसे पहले होता है। कई चुनाव किसानी के नाम पर लड़े जाते हैं मगर फिर भी यह बदहाल। दर्द सरकारों से नहीं। सरकारें तो योजनाएं बनाती हैं, लेकिन प्रशासनिक सिस्टम की अनदेखी दूर करने वाला कोई नहीं। शिकायत सदैव जनप्रतिनिधियों से ही रहती है। जिन्हें वोट देकर चुनते हैं वो बात नहीं सुनते।

शुक्रवार को दैनिक जागरण ने हर वोट कुछ कहता है.. के तहत जब किसानों से बात की तो एक ही समस्या थी। सरकार समर्थन मूल्य तय करती है, मगर जनता को नहीं मिलता। सुरेंद्र और परवेश कहते हैं सरकार उपज क समर्थन मूल्य घोषित करती है, लेकिन कभी किसानों को दिलाने का प्रयास नहीं किया जाता। क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं माफिक नहीं होती है। मनोज कुमार और कोमल कहते हैं किसानों को कभी सूखा तो कभी बाढ़ की आपदा झेलनी पड़ती है, लेकिन दर्द इस बात का है उचित मुआवजा नहीं मिलता। सरकार के नुमाइदें क्षति का आंकलन ही सही नहीं कराते। नन्हीं सिंह का दर्द था सरकार ने किसानों का ऋण माफ किया था, लेकिन गरीब किसान को इसका लाभ नहीं मिल सका, संपन्न किसानों ने फायदा उठाया। मोहनपुरा में मटर मंडी को आज तक कोई प्रोत्साहन नहीं मिला। —–

अगर मटर की मंडी को सब्जी मंडी में स्थांतरित कर दिया जाए तो उचित रेट मिलेगा तथा बिचौलियों के उत्पीड़न से भी निजात मिलेगी।’-अजय कुमार पुंढ़ीर, किसान

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‘जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के दौरान ही दिखाई देते हैं जनता की समस्याओं से सरोकार नहीं रखते। कम से कम उनकी जवाबदेही तय हो।’-मक्खन सिंह, किसान

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ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बिल्कुल गिरा हुआ है। विद्यालयों में शिक्षक पहुंचते नहीं है। इसमें सुधार के प्रयास करने चाहिए।’-भाग सिंह, किसान

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‘सिचाई की उचित व्यवस्था नहीं है। अधिकतर सरकारी नलकूप खराब रहते हैं। बंबों और रजवाहों में पानी नहीं मिलता।’-जगदीश, किसान