दो हजार हेक्टेयर गेहूं की फसल खराब, फिर भी सरकार ने जान-माल के नुकसान की मांगी रिपोर्ट

गणेश योगी 

जिले समेत प्रदेश भर में गत दिनों आए तेज अंधड़ व बारिश,ओलावृष्टि से खासकर गेंहूं की कटी व खड़ी फसलों में काफी नुकसान हुआ है। जिले में भी करीब दो हजार हैक्टेयर में खेतों में खड़ी व कटी पड़ी गेंहूं की फसल में नुकसान हुआ है। इसके अलावा कई जगह टीन-टप्पर भी उडने समेत कुछ मवेशियों की मौत हुई है। इसके बावजूद सरकार की ओर से अभी तक जान-माल के नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। इससे हजारों बीघा में गेंहूं की फसल खराब होने का नुकसान झेल चुके किसानों की चिंता बढ़ गई है। दो दिन तक भी फसल खराबे को लेकर सरकार की ओर से काई सर्वे कराने के आदेश प्रशासन के पास नहीं आने से किसान मायूस है। यही नहीं नियमानुसार आवासीय के अलावा अन्य टीन-छप्पर भी ढहने का मुआवजा आदि नहीं मिलने से किसानों को दोहरी मार से गुजरना पडेगा।

कृषि विभाग के अनुसार इस साल जिले में रबी फसल की बोआई का लक्ष्य चार लाख 28 हजार 300 हैक्टेयर था। इसके मुकाबले जिले में बारिश कम होने के बावजूद चार लाख 65 हजार हैक्टेयर में विभिन्न कृषि जिंसों की बोआई हुई। इसमें सबसे अधिक सरसों की सवा तीन लाख हैक्टेयर में बोआई हुई। वहीं गेंहूं की बोआई का लक्ष्य 4200 हैक्टेयर था, लेकिन सिंचाई के पानी की व्यवस्था कम होने से किसानों ने गेंहूं की बोआई की।

खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल में बािरश व ओलों से भारी नुकसान हुआ, थम नहीं रहे किसानों के आंसू

बंथली। दो दिन पूर्व अंधड़ एवं बारिश के बाद अभी भी भरणा गांव के खेतों में पानी भरा हुआ हैं। इससे गेहूं की कटी पड़ी फसल खराब होने के कगार पर हैं।

खेतों में भरा है पानी, किसान फसल बचाने में जुटे

तेज अंधड़ व बारिश से भीगी गेहूं की कटी पड़ी फसल को खराब होने से बचाने के लिए किसान फसल को सुखाने में लगे हुए है। हालांकि कई खेतों में भी पानी अभी भरा होने से किसानों को फसल को बचाने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

नहीं हुआ ज्यादा खराबा, इंश्योरेंस कंपनी को कहा है सर्वे के लिए:

कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर महेश कुमार शर्मा ने बत या कि गेंहूं को छोड़कर अन्य फसलों की कटाई कर किसानों ने तैयार कर ली है। गेहूं की भी करीब 1300 हैक्टेयर में गेंहूं की फसल खड़ी है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में गेंहूं की कटी फड़ी फसल भीगी है। वह भी सूख जाएगी। दाना हल्का सा गीला रहेे से भाव में कोई विशेष अंतर नहीं रहेगा। वहीं कलर में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। जिले में ओलावृष्टि कुछ जगह ही थोड़ी देर हुई थी। ऐसे में जिले में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।

फसल के खराबे की रिपोर्ट नहीं मांगी: एसडीएम

एडीएम कैलाशचंद शर्मा ने बताया कि जिले में कुछ मवेशियों के मरने समेत दो-तीन लोग चोटिल होने व कुछ जगह टीन-टप्पर उडने की सूचना मिली है। अभी तक उच्च स्तर से मात्र जान-माल के नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। फसल खराबे का सर्वे कराने को लेकर अभी तक कोई आदेश नहीं मिला है। एडीएम कैलाशचंद शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक आपदा में जान-माल का नुकसान होने पर सरकार की अखोर से सहायता राशि नियमानुसार दी जाती है। माल का नुकसान भी आवासीय मकान व घर माना जाता है। किसी की कार तेज अंधड़ से दुर्घटनाग्रस्त होने समेत टीन-टप्पर उडने आदि प्राकृतिक आपदा नहीं माना गया है। प्राकृतिक आपदा जैसे औलावृष्टि, आकाशीय बिजली गिरने आदि से आवासीय मकान व घर ढहने पर नियमानुसार सरकार सहायता राशि उपलब्ध कराती है।