एनएच पर जिस नाम के बोर्ड लगाए, उस नाम के गांव जिले में ही नहीं, गफलत में पड़ रहे यात्री

राहुल जैन 

राजगढ़ आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे को ब्यावरा से देवास तक फोरलेन में तब्दील किया गया है। हाईवे निर्माण के दौरान दोनों तरफ शहर सहित कस्बों में हुई भारी तोड़फोड़ के कारण संबंधित गांव के नक्शा व बनावट ही बदल गई है। ऊपर से हाईवे निर्माण कंपनी ओरिएंटल द्वारा संबंधित गांव और कस्बों के नाम से लगाए गए सांकेतिक बोर्ड को देखकर लोग गफलत में आकर गलत रास्ता पकड़कर भटक रहे हैं।

एबी रोड पर ब्यावरा से पचोर तक निर्माण एजेंसी ने कई जगह गलत नाम और गलत जगह पर गांवों के सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। जिस स्थान पर जिस गांव के नाम से बोर्ड लगाए गए हैं, उनसे आसपास के गांव व कस्बों से कोई संबंध नहीं है। वहीं ऐसे नाम के बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिनके नाम से आसपास तो क्या जिले में ही कोई गांव नहीं है।

करनवास में लगाया नायदा गांव का बोर्ड

ब्यावरा से पचोर के बीच ही आधा दर्जन से अधिक स्थान पर गलत सूचना बोर्ड लगे हुए हैं। नगर के नायदा गांव के नाम से सांकेतिक बोर्ड लगाया गया हैं। जबकि यहां करनवास के नाम से बोर्ड लगाया जाना था। एजेंसी द्वारा लगए नायदा नाम का गांव आसपास दूर तक कोई गांव नहीं है। इससे करनवास आने वाले लोग कई किमी आगे तक निकल जाते हैं, जहां किसी से पूछने पर उन्हें फिर लौटकर आना पड़ता है। वहीं साइन बोर्ड पर नए गांव का नाम दिखाई देने से गफलत में भी पड़ जाते हैं। जबकि कई लोग अपनी दिशा वाली जगह नही पहुच कर दूसरे गांव पहुच जाते हैं।

0 किमी दूर लगाया बोर्ड

हाईवे पर भाटखेड़ी अमर पैलेस के ठीक सामने शाहपुरा गांव का बोर्ड लगा गया है। जबकि यह गांव दूधी नदी के पास पड़ता है। लेकिन 10 किलोमीटर आगे पचोर की ओर लगाया गया है। इसी तरह भाटखेड़ी ओवरब्रिज पर वनखेड़ी के नाम से सांकेतिक बोर्ड लगाया गया है। जबकि दूर-दूर तक और जिले में इस नाम का कोई गांव या शहर ही नहीं है।

दिशा सूचक बोर्ड भी लगाए गलत

गांव उदनखेड़ी में बड़ी पुल के पास संकेत बोर्ड पर रोशिया ओर जोगीपुरा एक ही दिशा में दर्शाया गया है। जबकि जहां बोर्ड लगा है वह से न तो कोई रोड गांव में जाता है न रोड है। ऐसे में अनजान राहगीर भटकते रहते हैं। सारंगपुर से आने पर पहले जोगीपुरा का रोड उत्तर दिशा में आता है, जबकि रोशिया दक्षिण दिशा में है, लेकिन संकेत बोर्ड पर गलत डायरेक्शन दिया गया है।