मोदी बोले- हम उस परंपरा के हैं, जो किसी को छेड़ते नहीं हैं और किसी ने छेड़ा तो उसे छोड़ते नहीं हैं

जयपुर. पीएम नरेंद्र मोदी सोमवार को उदयपुर पहुंचे। इस दौरान स्टेज पर दीया कुमारी, गुलाबचंद कटारिया समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। यहां मोदी ने कहा कि जो 21वी सदी में पैदा हुआ है वो वोट 21वीं शताब्दी के लिए देगा। उसे अपने सपने इसी शताब्दी में  साकार करने है। उसके लिए जो भी है ये शताब्दी है। इसके साथ मोदी ने कहा कि भाइयों हम उस परंपरा के हैं कि किसी को छेड़ते नहीं है और किसी ने छेड़ा तो छोड़ते भी नहीं है।

पीएम मोदी ने कहा कि साथियों मां भारती का वैभव बढ़ाने की जिम्मेदारी उन युवा साथियों पर भी है जो लोकसभा में पहली बार वोट कर रहे हैं। बाकी कोई पांच या दस साल के लिए वोट डालने जाएगा। जो 21वी सदी में पैदा हुआ है वो वोट 21वीं शताब्दी के लिए देगा। उसे अपने सपने इसी शताब्दी में  साकार करने है। उसके लिए जो भी है ये शताब्दी है। इस शताब्दी का भाग्य इन पांच वर्षों में देश की जो मजबूत नींव बनेगी। वो 21वीं सदी का भाग्य निर्धारित करने वाली है। जो पहली बार लोकसभा के चुनाव में मतदान करने जा रहे हैं। उन्हे मैं शुभकामनाए देता हूं और प्रधानसेवक के रूप में स्वागत करता हूं। एक माह बाद 23 मई को चुनाव नतीजों के बाद फिर एक बार मोदी सरकार आप बनाएंगे। तब हम सभी इस सपने को साकार करने के लिए जी जान से जुटने वाले हैं।

साथियों भाजपा एनडीए ने ये दिखा दिया है कि इस देश में एक इमानदार सरकार चलाना भी संभव है। आपके सहयोग से पूरे देश में इमानदारी की एक नई नीति स्थापित हो रही है। अगर अब कोई धनवान बैंक का पैसा वापस नहीं करता तो वो चैन की नींद नहीं सो पाएगा। अगर कोई देश से भागने की कोशिश करता है दो उसके लिए भागना मुश्किल होगा। जो भागकर देश से बाहर गया है। उसे मिशेल मामा की तरह उठाकर वापस लाया जाएगा।

ये हमारी सरकार है जिसने बैंक का पैसा खाने वालों को सजा दी है। साथियों पहले की सरकार अपने अरबपति साथियों को फोन बैंकिंग की परंपरा से कर्ज दिलवाती थी। हम मुद्रा बैंक के जरिए गरीब और आदिवासी सथियों को बिना गारंटी कर्ज दे रहे हैं। ऐसा देश में शायद पहली बार हुआ होगा। पहली बार सवा चार करोड़ लोगों ने बैंक से पैसा लिया। अपना नया काम शुरू किया।

भाइयों हम उस परंपरा के हैं कि किसी को छेड़ते नहीं है और किसी ने छेड़ा तो छोड़ते भी नहीं है। मेवाड़ के बारे में ये मशहूर है कि घास की रोटी खा सकते हैं लेकिन आत्म सम्मान से समझौता नहीं कर सकते, ये संस्कार महाराणा प्रताप ने हमें दिये हैं। ये संस्कार महाराणा प्रताप हमे देते हैं, लेकिन ये मिलावटी कांग्रेस कहती है कि आतंकवाद की बात नहीं करनी चाहिए। इनकी बातों में आने वाला कोई और हो सकता है मोदी नहीं। आतंकवाद पर मोदी प्रहार कर रहा है। खुश हैं ना आप लोग। घर में घुसकर मारता है। राष्ट्रिय सुरक्षा के बारे में चुनावों में चर्चा होनी चाहिए। ये कोई नगर परिषद या विधानसभा का चुनाव नहीं है। लोकसभा का चुनाव है। इसमें राष्ट्र सुरक्षा की बात होनी चाहिए। कांग्रेस और उनके महामिलावटी हमारे सपूतों के शोर्य का सबूत मांग रहे हैं। देश के सपूतों ने देश का माथा ऊंचा किया है। ये सबूत वाली गैंग ने माथा नीचे किया है।

चुनाव से दस दिन पहले जो उनका टेप रिकॉर्ड बजता था। पहले दो चरण के चुनाव में लोगों ने ऐसा सबूत दिया। इनका टेप रिकॉर्ड बंद हो गया। चुनाव के पहले दो चरणों में नामदारों को जनता ने सबूत दे दिया है। अगले पांच चरणों में भी देश के लोग, देश के वीर जवानों पर उठाये सवालों का जवाब चुन-चुनकर देने वाले हैं।

हमारी सरकार ने देश की साख बढ़ाने, सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही आपका जीवन आसान बनाने का भी लगातार प्रयास किया है। इसका एक उदाहरण है – पासपोर्ट, देश भर में बीते 5 वर्षों में 300 से ज्यादा नए पासपोर्ट केंद्रों की स्थापना की गई है। हाईवे, रेलवे, एयर वे के अलावा आई वे यानि मोबाइल फोन और इंटरनेट के लिए भी हमने बहुत सारे विकास के कदम उठाए हैं। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत गांव-गांव तक नेटवर्क अच्छा करने का प्रयास किया जा रहा है।

बीते पांच साल में जिस तरह से भारत में विदेशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, पर्यटकों से आने वाला राजस्व बढ़ा है, उसका सीधा लाभ राजस्थान के लोगों को भी मिला है।

ये कहता है सियासी थर्मामीटर

यह आदिवासी मतदाता बहुल सीट है। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार आदिवासी समुदाय से हैं। एक उम्मीदवार बीटीपी का भी है। आसपुर, खेरवाड़ा में बीटीपी की बड़ी मौजूदगी है। विधानसभा चुनाव में आसपुर में बीटीपी कांग्रेस को पछाड़ दूसरे नंबर पर थी। बीटीपी की तरफ झुकाव रखने वाले ज्यादातर परंपरागत मतदाता कांग्रेस समर्थक हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान आंतरिक विरोधों और कई नेताओं की नाराजगी के बावजूद सात विधानसभा सीटें जीती थीं और पार्टी के नाराज धड़ों को भी साथ ले आए। कांग्रेस के लिए पार्टी के अंदर एकजुटता की कमी दूर करने की बड़ी चुनौती है।