पानी के लिए बूंद बूंद तरस रहे हैं

-दिनेश ठाकुर-
राजौरी:जिला राजौरी के पहाड़ी क्षेत्रों के लोग पीने के पानी के लिए कितने परेशान हैं इसका वर्णन करना अत्यंत कठिन है यूं तो जम्मू कश्मीर राज्य का ऐसा कोई क्षेत्र या गांव नहीं जहां पीएचई विभाग नहीं पहुंचा पर क्या वर्तमान में विभाग इन गाँब मे कोई कार्य कर रहा है? इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं
यूं तो जम्मू कश्मीर में जनता को हर सुविधा देने का वायदा किया जाता है और कई बार केंद्र सरकार से बड़े-बड़े पैकेजों की घोषणा भी होती हैं पर क्या वह घोषणाएं आम जनता तक पहुंचती हैं आज तक इस बात का कोई जवाब किसी के पास नहीं है
पूरे देश की भांति जम्मू कश्मीर में भी केंद्र सरकार की योजना के तहत शौचालय बनाने का कार्य चल रहा है पर किसी के पास इस बात के आंकड़े नहीं हैं कि इन दूरदराज के गांवों में क्या शौचालय बने हैं या नहीं हमारे संवाददाता ने जब ऐसे ही गांव कनथूल तहसील ख्वास का दौरा किया तो आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले थे जब लोगों से यह पूछा गया कि आपके गांव में कितने शौचालय बने हैं?तो लोगों का जवाब था कि इस गांव में पीने का पानी कई किलोमीटर दूर से घोड़ों पर लादकर लाना पड़ता है और जहां पीने के पानी के लिए घोड़ों का इस्तेमाल होता हो उस गांव में क्या शौचालय बनाने वाली केंद्र की योजनाएं लागू हो सकती हैं ऐसे ही जिले के कई गांव हैं जहां पानी का अकाल पड़ा है यह लोग बावरियों से पानी पीते आ रहे हैं और यही इनके पानी का स्रोत भी है जो विष्म गर्मी में सूक जातीं हैं पर जब हर वर्ष केंद्र एवं राज्य सरकारें बड़े बड़े बजट बनाती हैं तो उसमें लोगों को पीने के पानी की सुविधा मिले इस पर भी करोड़ों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं पर क्या वह रुपए जमीन पर लगे हैं इस और किसी का ध्यान नहीं जाता इन क्षेत्रों में विभाग के कार्यालय तो हैं कर्मचारी भी हैं टूटी फूटी और पानी व्हीन पाइपों भी हैं पर उनमें कई वर्षों से पानी नहीं आया तो फिर ऐसे विभाग का क्या लाभ। इसमें कोई संकोच नहीं कि जिस गांव में पीने का पानी तक सरकार उपलब्ध नहीं करा सकती वहां पानी के साथ चलने वाली अन्य योजनाएं जैसे शौचालय,पशुपालन, मछली उधोग इत्यादि क्या लागू हो सकती हैं