सवाई माधोपुर [अजय शेखर शर्मा ]लोन लिया ही नहीं, 53 लाख की कर्ज माफी के लिए 130 किसानों के नाम

सवाई माधोपुर

किसान की आस को कभी मौसम खा जाता है तो कभी बाजार का भाव। ऐसे में अगर सरकार परेशान किसान की किसी प्रकार मदद करना चाहती है तो उस में भी मदद पहुंचाने वाले लोग एवं संबंधित संस्थाओं के कर्मचारी घोटाला कर उसके मुंह का निवाला छीनने बाज नहीं आ रहे है।

आलम यहां तक पहुंच चुका है कि जिन किसानों ने जीवन में कभी सहकारी समितियों से ऋण ही नहीं लिया, कर्मचारी उनके नाम का ऋण बता कर सरकार से पैसा उठाने से भी बाज नहीं आ रहे है। ऐसा ही एक बड़ा घोटाला हाल ही में सामने आने के बाद जहां जिले के किसान अचंभित एवं हैरान है, वहीं भंडाफोड़ होने के बाद सीसीबी की भी आंखें फटी रह गई है। आनन फानन में बैंक ने सरकार को उक्त जीएसएस के 130 लोगों का भुगतान रोकने के लिए सरकार को पत्र लिख दिया है।

इस मामले का भंडाफोड उस समय हुआ जब ग्राम सेवा सहकारी समिति भाड़ौती के अधीन ऋण लेने वाले लोगों ने ऑनलाइन गांव में ऋण माफी के योग्य लोगों की सूची देखी। इस सूची में कई ऐसे लोगों के नाम दिखे जिन लोगों ने जीवन में कभी किसी प्रकार का ऋण ही नहीं लिया और उनके नाम पर ऋण दिखा कर सरकार से माफी की मांग की गई थी।

मामला सामने आने के बाद लोगों ने इसकी शिकायत संबंधित जीएसएस के अध्यक्ष एवं अन्य अधिकारियों से की गई, लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन गांव के लोगों पीछे नहीं हटे और इस घोटाले को रोकने के लिए संघर्ष शुरू कर दिया।

दुस्साहस : कर्मचारी ने न केवल फर्जी नाम सूची में डाले, वरन दस्तावेज भी लगाए

शिकायत पर अध्यक्ष-अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान

अध्यक्ष ने किया बचाने का प्रयास : इस मामले की गंभीरता एवं अनियमितता के प्रमाण सामने आने के बाद सीसीबी के अधिकारियों ने संबंधित जीएसएस के अध्यक्ष को पत्र देकर इस जीएसएस के सचिव के खिलाफ कदम उठाने के लिए कहा, लेकिन अध्यक्ष ने इस पत्र को कोई अहमियत नहीं दी, जिससे लगा की इस गड़बड़ी में हो सकता है वह भी किसी प्रकार शामिल हो।

जांच में मिले 130 नाम : एमडी केदार मीना ने बताया कि मामला सामने आने के बाद इस जीएसएस के सभी ऋण धारकों की जांच की जा रही है। अब तक इस में 130 लोगों के फर्जी नाम पाए जा चुके है। एमडी की जांच रिपोर्ट बताती है कि इन 130 फर्जी नामों पर 52 लाख 78 हजार 826 रुपए का कर्ज बताया गया था। यह सूची भी ऋण माफी के लिए भेजी जा चुकी थी।

अजब तर्क- समिति की हालत सुधारने के लिए किया

मेरी नीयत गलत नहीं थी


क्या थी गड़बड़ी : इस बारे में केन्द्रीय सहकारी बैंक के एमडी केदार मीना से ने जब बात की तो उन्होंने बताया कि इस जीएसएस के सचिव द्वारा ऋण माफी के लिए जो सूची दी गई थी, उनमें कई नाम ऐसे थे, जिनके नाम पर कभी ऋण हुआ ही नहीं था। इस कर्मचारी ने न केवल उनके नाम सूची में डाले, उक्त फर्जी नामों की आईडी एवं दूसरे दस्तावेज भी लगा रखे थे। उसने सरकार का पैसा गलत तरीके से उठाकर हजम करने के लिए हर स्तर पर गड़बड़ी कर रखी थी।