बीमार अस्पताल की हालत सुधारने के कलेक्टर के आदेश की हवा निकल रही है

 

राजगढ सत्येन्द्र व्यास

बीमार अस्पताल की दशा सुधारने में कलेक्टर के निर्देश की उड़ी धज्जियां,स्वछता सर्वेक्षण की भी खुली कलई, बीमारों का कैसे हो उपचार ?
व्यवस्थाएं ध्वस्त जिम्मेदार मस्त
राजगढ़- एक जमाने में जिले समेत शहर के रहवासियों के उपचार के लिए आमजन दूर दराज से इलाज के लिए राजगढ़ जिला अस्पताल आकर इलाज करवाया करते थे लेकिन देखते ही देखते हालात ऐसे बने की इलाज के नाम पर या तो भोपाल रेफर कर दिया जाता है या फिर मामला चाहे प्रसूति का हो या फिर गंभीर रोग का हो केस बिगाड़ कर बाहर दिखाने की सलाह दे दी जाती है या फिर रुपये दो इलाज कराओ जिला अस्पताल के ऐसे बिगड़े हालात को सुधारने की दिशा में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा भी जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान उपचार समेत सभी व्यवस्थाए सुधारने व् स्वछता बनाए रखे जाने के लिए अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए थे ऐसे निर्देश जिला प्रशासन के एडीएम, एसडीएम,जिला पंचायत अध्यक्ष,तत्कालीन विघायक द्वारा समय समय पर निर्देश दिए जाते रहे अनेको बार कड़ी फटकार लगने के बाद भी आदतन अस्पताल प्रशासन दिनभर चले और अढ़ाई कोस की तर्ज पर ही काम कर रहा है मौजूदा हालात में एक बार फिर जिले की मुखिया कलेक्टर निधि निवेदिता के द्वारा जिला अस्पताल की दशा सुधारने के निर्देशों को अस्पताल प्रशासन द्वारा हवा में उड़ा दिए गए करोड़ो की लागत से बने ट्रामा सेंटर समेत 450 बेड के जिला अस्पताल में आमजन जाने से कतराने लगे है और जो उपचार के नाम पर यातना भोग रहे हे वह किसी से छुपा नहीं है जिसका नजारा वार्डो में घूमते जानवर व मवेशियों का विचरण देखा जा सकता है वही आसपास के रहवासी भी बीमारियों के साए में जी रहे हे ट्रामा सेंटर के पीछे फैली गंदगी का निकास न होने के कारण आसपास के स्वस्थ रहवासी रोगों के साए में जी रहे हे यह सब देखते व जानते हुए भी अस्पताल प्रशासन मुक दर्शक बन चुप्पी साधे बैठा है जो की समझ से परे हे ऐसे में जिले समेत नगर के रहवासीयों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कोन उपलब्ध कराएगा ?