Breaking
बदलनी होंगी स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताएं: आम जनता की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार किया जाना आवश्यक राष्ट्रपति चुनाव: बेलारूस में लुकाशेंको छठी बार जीते, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प, एक की मौत ऑनलाइन परीक्षा : कश्मीर में धीमी गति की इंटरनेट सेवा छात्रों के लिए परेशानी का सबब पायलट-राहुल की मुलाकात से कांग्रेस का राजस्थान संकट सुलझ सकता है, मुख्यमंत्री गहलोत से होंगे मतभेद दूर बेरूत धमाके को लेकर उपजे जनाक्रोश के चलते लेबनान के प्रधानमंत्री ने पूरी कैबिनेट के साथ दिया इस्तीफा मुख्‍यमंत्रियों की बैठक में पीएम मोदी बोले, बाढ़ की पूर्व सूचना प्रणाली में नई तकनीक का उपयोग हो कांग्रेस सांसद के आरोपों पर पुरी का करारा पलटवार, बोले- बिना जानकारी के ना करें बात ICC बोर्ड बैठक रही बेनतीजा, नहीं बनी चेयरमैन के उम्मीदवार के नाम पर सहमति कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए मोदी सरकार के कदमों से 74 फीसद ग्रामीण संतुष्ट छह स्‍वदेशी स्वाति रडार खरीद रही सेना, 50 किमी के दायरे में दुश्‍मन के विमान को कर लेगा डिटेक्‍ट

रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक का महापर्व: आचार्य संजीव शास्त्री

नरेश कुमार

श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व भाई का बहन के प्रति प्‍यार का प्रतीक है। सोमवार 3 अगस्त को रक्षाबंधन(राखी) का पावन पर्व मनाया जाएगा इस विषय में आचार्य संजीव शास्त्री जी का कहना है कि इस दिन बहन अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती है रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है।रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। और उनकी दीर्घायु व प्रसन्‍नता के लिए प्रार्थना करती हैं ताकि विपत्ति के दौरान वे अपनी बहन की रक्षा कर सकें। बदले में भाई, अपनी बहनों की हर प्रकार के अहित से रक्षा करने का वचन उपहार के रूप में देते हैं।

शास्त्री जी का कहना है कि राखी का पर्व जिसे रक्षाबंधन के नाम से भी जाना जाता है दरअसल यह श्रावणी उत्सव है जिसका जिक्र हमारे धर्म ग्रंथों में भी मिलता है। इस दिन कलाई में रक्षासूत्र बांधने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। गुरु शिष्य परंपरा में शिष्य इस दिन अपने गुरुओं को रक्षासूत्र बांधा करते थे।

लेकिन जिन बहनो के भाई नहीं हैं या जिन भाइयो के बहिने नहीं है वे रक्षाबंधन पर मायूस से रहते हैं, पर मायूसी की बात नहीं है बहिने अपने सुहाग की रक्षा के लिए एवं सर्वाविध सुख शांति की कामना के लिए आंवले के वृक्ष को राखी बांधे आंवले का वृक्ष न मिले तो पीपल को रक्षा सूत्र बांधे और उसे अपना भाई समझे पीपल में भगवान् विष्णु का वास होता है जिन भाइयो के बहिन नहीं है जा दूर हैं वे रक्षा सूत्र भगवती तुलसी को बांधे आंवले पीपल एवं तुलसी उपलब्ध न हो तो शमीवृक्ष केला आम जामुन पलाश गुल्लर बरगद बिल्ब वृक्ष अंजीर आदि को भी रक्षासूत्र बाँध सकते हैं भाई बहिन के होने पर भी रक्षाबंधन पर वृक्षारोपण एवं वृक्षों को रक्षासूत्र बाँध कर उनकी रक्षा का संकल्प लेना पुण्य फलदायी होता है

पौराणिक कथा के अनुसार

राजा बलि से जुड़ी कथा स्कन्धपुराण,पद्मपुराण, श्रीमद्धभागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबंधन का प्रसंग मिलता है एक सौ यज्ञ पूर्ण कर लेने पर दानवेन्द्र राजा बलि के मन में स्वर्ग के प्राप्ति की इच्छा बलबती हो गयी सिंघासन डोलने लगा इन्द्र आदि देवताओ ने भगवान् विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की भगवान् ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर लिया और राजा बलि से भिक्षा माँगने पहुँच गए उन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि भिक्षा में मांग ली बलि के गुरु शुक्रदेव ने ब्राह्मण का वेष धारण किए हुए भगवान् विष्णु को पहचान लिया और बलि को इस बारे में सावधान कर दिया किन्तु दानवेन्द्र राजा बलि अपने बचन से न फिरे और तीन पग भूमि दान कर दी वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया तीसरा पाँव कहाँ रखे बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया यदि वह अपना बचन न निभाते तो अधर्म होता आखिरकार बलि ने अपना सिर भगवान् के आगे कर दिया और कहा तीसरा पग आप मेरे सर पर रख दीजिये वामन भगवान ने वैसा ही किया पाँव रखते ही वह रसातल लोक में पांच गया

जब बलि रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात दिन अपने सामने रहने का बचन ले लिया और भगवान् विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा भगवान् के रसातल निवास से परेशान लक्ष्मी जी ने सोचा कि यदि स्वामी रसातल में द्वारपाल बनकर निवास करेंगे तो वैकुंठ लोक का क्या होगा इस समस्या के समधान के लिए लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाए सुझाया लक्ष्मी जी ने राजा राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबंधन बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान् विष्णु को अपने साथ ले आयी इस दिन श्रवण पूर्णिमा तिथि थी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तभी से रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाने लगा

राखी बांधते समय बहने इस मन्त्र का उच्चारण करे तो भाई की आयु में वृद्धि होती है

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

रक्षाबंधन (राखी) बांधने का मुहूर्त
प्रात: 09:30 से रात्रि 09:14 तक अपराह्न काल में राखी बांधना और भी श्रेष्ठ माना जाता है

पूर्णिमा तिथि आरम्भ:(2 अगस्त) रात्रि 09:29 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्त:(3 अगस्त) रात्रि 09:29 मिनट पर।