मास्क और सैनिटाइजर पर 18 फीसदी जीएसटी लगाने को हाईकोर्ट में चुनौती

नई दिल्ली, 07 अगस्त। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मास्क और सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा कर उन पर 18 फीसदी जीएसटी लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता गौरव यादव और वकील आरती सिंह ने दायर किया है। हाईकोर्ट इस याचिका पर 11 अगस्त को सुनवाई करेगा।
याचिका में मांग की गई है कि वित्त मंत्रालय और जीएसटी काउंसिल अल्कोहल से बने सैनिटाइजर पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर 5 या 12 फीसदी किया जाए। याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार के 13 मार्च और 30 जून के उस नोटिफिकेशन को बहाल किया जाए जिसमें मास्क और सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल किया गया था। याचिका में मास्क और सैनिटाइजर की कीमत 8, 10, 16 और 100 रुपये फिक्स करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती गई है।
याचिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद दुनिया भर के हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की ओर से जारी एडवाइजरी में हाथों को धोते रहने और चेहरे पर मास्क लगाने के निर्देश जारी किए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बीमारी को वैश्विक महामारी करार दिया है। इस बीमारी से बचाव के लिए मास्क और सैनिटाइजर की हर व्यक्ति को जरुरत है।
याचिका में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 2ए का जिक्र किया गया है जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार को जो वस्तु लोगों के लिए जरुरी लगती है उसे आवश्यक वस्तु की श्रेणी में डालती है। केंद्र सरकार आवश्यक वस्तु की सप्लाई को रेगुलेट करती है ताकि उनकी कोई किल्लत नहीं हो। याचिका में कहा गया है कि 30 जुलाई तक भारत में 35,747 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कोरोना के 5,45,318 एक्टिव केस दर्ज हैं। जब मामले लगातार बढ़ रहे हैं ऐसे में मास्क और सैनिटाइजर्स को आवश्यक श्रेणी से हटाना गलत है।