RBI ने Repo Rate में नहीं किया कोई बदलाव, दिसंबर से किसी भी समय कर सकेंगे RTGS

नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति की तीन दिन से जारी बैठक के नतीजों की घोषणा की। शीर्ष बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस वर्ष दिसंबर महीने से किसी भी समय RTGS किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021 की जीडीपी में 9.5 फीसद की मंदी देखी जा सकती है। सितंबर महीने में पीएमआई बढ़कर 56.9 हो गया, यह जनवरी 2012 के बाद से सबसे अधिक है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में उधार की औसत लागत 5.82 फीसद पर है, यह 16 साल में सबसे कम है।’ शक्तिकांत दास ने कहा, ‘तेज और मजबूत रिकवरी संभव है। लिक्विडिटी व आसान वित्तीय स्थितियों तक पहुंच के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार हैं। हम गैर-विघटनकारी उधार कार्यक्रम सुनिश्चित करने के लिए लिक्विडिटी डाल रहे हैं। शेष सरकारी उधार को एक गैर-विघटनकारी तरीके से पूरा किया जाएगा।’ रिज़र्व बैंक की नई-गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बुधवार को अपनी तीन दिवसीय बैठक की शुरुआत की थी। आइए जानते हैं उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस की बड़ी बातें…

RBI Monetary Policy UPADTE

  • आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘आरबीआई बैंकों को खुदरा व छोटे उधारकर्ताओं के लिए 7.5 करोड़ रुपये तक का एक्सपोजर बढ़ाने की अनुमति देगा। केंद्रीय बैंक 31 मार्च 2022 तक सभी नए आवास ऋणों के लिए जोखिम भार को युक्तिसंगत बना रहा है और सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) को सह-ऋण देने के लिए योजना का विस्तार कर रहा है।’
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘बढ़ा हुआ उधार रोजकोषीय प्रोत्साहन और गिरते कर राजस्व के कारण है। बॉन्ड खरीदते समय मार्केट पार्टिसिपेंट्स को RBI के संकेतों को समझना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ेगी और तीसरी व चौथी तिमाही में इसमें सुधार आने की उम्मीद है। वहीं, सकल मांग नर्म बनी रहेगी।’
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘केंद्र के लिए WMA की सीमा  1.25 लाख करोड़ रुपये रखी गई है।’
  • आरबीआइ ने एलान किया है कि दिसंबर, 2020 से RTGS किसी भी समय भी किया जा सकेगा।
  • आरबीआइ गवर्नर ने कहा, ”भय और निराशा का माहौल अब आशा में बदल रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है और इसके लक्ष्य के आसपास रहने की संभावना है। चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सकारात्मक अंकों में रह सकती है। विभिन्न सेक्टर्स में वेरिएशन के साथ भारत में तेज रिकवरी होने की संभावना है। कृषि, कंज्यूमर गुड्स, बिजली और फार्मा सेक्टर्स में तेज रिकवरी हो सकती है।”
  • आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ”मैं आशावादी हूं। आर्थिक स्थिति में हो रहे बदलाव इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि हम बेहतर कल का सपना देख सकते हैं। तीसरी तिमाही में वैश्विक अर्थव्यवस्था की गतिविधियों में असमान रूप से ही लेकिन रिबाउंड देखने को मिला है।
  • वैश्विक आर्थिक स्थिति अच्छी स्थिति में है। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही का गहरा संकुचन पीछे छूट चुका है। भारत कोविड से पूर्व की वृद्धि के आंकड़े को छू सकता है।”
  • आरबीआइ गवर्नर ने अपने संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति के नए सदस्यों का स्वागत किया और उनका आभार प्रकट किया।उन्होंने विश्लेषणात्मक सहयोग के लिए टीम का भी आभार जताया। उन्होंने कहा, ”मौद्रिक नीति समिति ने वृद्धि को मजबूती देने के लिए सर्वसम्मति से रेपो रेट को चार फीसद पर अपरिवर्तित रखने के पक्ष में मत दिया और रुख को उदार बनाया रखा।”
  • आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। यह वर्तमान में चार प्रतिशत है और रिवर्स रेपो रेट को 3.35 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।
  • नवगठित मौद्रिक नीति समिति की बैठक सात, आठ और नौ अक्टूबर को हुई। रेपो रेट चार फीसद पर यथावत।
  • केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर को लेकर अपने रुख को ‘उदार’ बनाए रखा है।

छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक पहले 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक होने वाली थी, लेकिन बाद में इसकी तारीखों में बदलाव किया गया, क्योंकि स्वतंत्र सदस्यों की नियुक्ति में देरी हुई थी। सरकार ने तीन प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों आशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और शशांक भिडे को आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाले एमपीसी के सदस्य के रूप में नियुक्त किया है।