जेपी डुमिनी विश्व कप के बाद संन्यास लेंगे, रन आऊट से जोड़ा अनोखा रिकॉर्ड है उनके नाम

जालन्धर : दक्षिण अफ्रीका के ऑलराउंडर जेपी डुमिनी ने क्रिकेट विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। डुमिनी ने अभी 2017 में ही व्हाइट बॉल क्रिकेट पर फोक्स करने के लिए टेस्ट से संन्यास लिया था। हालांकि डुमिनी टी-20 इंटरनैशनल व घरेलू क्रिकेट खेलते रहेंगे। डुमिनी के रिटायर होने पर दक्षिण अफ्रीकी टीम को उनकी जगह भरने में दिक्कत आएगी। डुमिनी के नाम पर रिकॉर्ड है कि वह कभी भी इंटरनेशनल क्रिकेट में रन आऊट नहीं हुए हैं।

बढ़ते हुए परिवार की ओर ध्यान देना प्राथमिकता

संन्यास के फैसले के बाद डुमिनी ने कहा कि यह बिल्कुल सही समय है वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने का। मैंने क्रिकेट का खूब लुत्फ उठाया है। पिछले कुछ महीनों से मुझे अपने करियर का फिर से आंकलन करने और भविष्य के लिए कुछ लक्ष्ण निर्धारण करने का मौका मिला था। तब मैंने महसूस किया कि मुझे संन्यास ले लेना चाहिए। हालांकि मैं अभी भी अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू टी 20 क्रिकेट खेलने के लिए उपलब्ध रहूंगा, क्योंकि अब मेरी प्राथमिकता अपने बढ़ते हुए परिवार की ओर ध्यान देना है।
जेपी डुमिनी का ओवरऑल करियर

Jp duminy retired from one day format after world cup 2019

डुमिनी की 2 शानदार पारियां जिन्होंने इतिहास बनाया

166 रन विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया, मेलबोर्न 2008 : डुमिनी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबोर्न टेस्ट में यादगारी पारी खेलकर चर्चा में आए थे। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 414 रन बनाए थे। जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने सवा सौ रन के भीतर अपने आठ विकेट गंवा लिए थे। ऐसे समय में डुमिनी ने स्टेन के ासथ 180 रन की पार्टनरशिप कर दक्षिण अफ्रीका को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। डुमिनी ने पहली पारी में 166 रन बनाए थे। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया टीम डेल स्टेन के कहर के आगे बिखर गई। दक्षिण अफ्रीका ने यह मैच बाद में आसानी से जीत लिया था।

141 रन विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया, पर्थ 2016 : डुमिनी ने अपने करियर के कुल 6 टेस्ट शतकों में 3 ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वाका के मैदान पर उन्होंने तब बेहतरीन पारी खेली जब उनकी टीम पहली पारी के आधार पर दो रन पिछड़ रही थी। शुरुआत दो विकेट जल्दी गिरने पर क्रीज पर आए डुमिनी ने डीन एल्गर के साथ 250 रन की पार्टनरशिप की थी। डुमिनी ने इस मैच में 141 रन बनाए थे। जो दक्षिण अफ्रीका को जीत दिलाने के लिए काफी थे।