शिक्षा के मंदिर में सोने को आते हैं शिक्षक

( राकेश चौधरी)

सवाई माधोपुर -बौली
मित्रपुरा -विद्यालय शिक्षा का मंदिर होता हैं ।और शिक्षा के मंदिर में अगर शिक्षा नहीं दी जाये और जो शिक्षा के दाता शिक्षक अगर अपने कर्तव्यों का पालन न करें तो ये विद्यार्थियों का दुर्भाग्य ही है।एक ईसी तरह का मामला सामने आया है और मामला है कोड्याई राज.उच्च मा.विद्यालय का।हाल ही में कुछ दिनों पूर्व छात्र-छात्राओं द्वारा ईसी विद्यालय में पढाई का स्तर ठीक नहीं होने से गुस्साए विद्यार्थियों ने स्कूल के गेट को ताला लगाने का मामला सामने आया था ।ओर अब स्कूल के ही अध्यापकों का कक्षा कक्षों में सोने का मामला सामने आया है।शिक्षकों द्वारा विद्यालयों को अपना आराम स्थल बनाया जा रहा है।लोगों का कहना है कि अध्यापक गण या तो मोबाइल में खोये रहते हैं ।या फिर बाहर बैठकर गप्पे लड़ाते रहते हैं।साथ ही बच्चों से शिक्षा नियमों के विरुद्ध वजन उठवाया जाता है।

जिस प्रकार शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।उन पर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं किया जाना उनकी कार्य शीलता पर सवालिया निशान लगाती है।और सवाल ये उठता है।कि आखिरकार ये जिम्मेदार अधिकारी ईन लापरवाह शिक्षकों पर कार्यवाही क्यों नही करते है।
इससे यह स्पष्ट होता है। शायद सरकारी स्कूलों में अधिकारियों के बच्चे भी पढ़ाई करते तो ऐसे शिक्षकों पर तुरंत कार्रवाई होती शायद यही कारण है ।जो निजी स्कूलों में आज सरकारी स्कूल से ज्यादा बच्चों का नामांकन है ।और गरीब किसान और मजदूर मजबूर इस हालत को देखकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए आज निजी स्कूलों में दाखिला दिलाते हैं। यह मामला एक सरकारी स्कूल का ही नहीं है क्षेत्र में सभी स्कूलों का यही हाल है अब यह देखना है। कि उच्च अधिकारी कब ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई करते हैं ।