हाईकोर्ट ने कहा- विवाहेत्तर संबंध हैं तो भी कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई नहीं

जयपुर. हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि भले ही विवाहेत्तर संबंधों को अनैतिक कहा जाए, लेकिन इसके आधार पर कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने प्रार्थियों  की निलंबन की कार्रवाई को रद्द करते हुए उनको सभी सेवा परिलाभ देने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश एसपी शर्मा ने यह आदेश पुलिस निरीक्षक महेशचन्द्र शर्मा और महिला कांस्टेबल की याचिकाओं पर दिया।

कोर्ट ने कहा कि पति या पत्नी के जिंदा रहते दूसरे से संबंध बनाने की प्रशंसा नहीं की जा सकती है, लेकिन इस आधार पर विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती। याचिका में कहा गया था कि उन्हें अवैध संबंधों के आधार पर 1999 में सेवा से निलंबित किया था। प्रार्थी महेश शर्मा का विवाह 1973 में ही हो चुका था। महिला कांस्टेबल से संबंधों के बाद संतान पैदा हुई।

डीएनए टेस्ट कराने के लिए 8 सितंबर 1999 को जयपुर उत्तर के एसपी कार्यालय ने बुलाया था। महिला कांस्टेबल की ओर से कहा गया कि बच्चे का जन्म अवैध संबंधों का परिणाम नहीं है। ऐसे में निजी मामले को लेकर निलंबन की कार्रवाई नहीं हो सकती। इसके बाद कोर्ट ने यह आदेश जारी किए।

कृष्ण के 16 हजार रानियां थीं, मौजूदा समय में भी संबंधों के नए परिपेक्ष्य सामने आ रहे हैं : कोर्ट
अदालत ने कहा कि पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश के दो पत्नियां और इन्द्र के कई अप्सराओं से संबंध की बात के अलावा भगवान कृष्ण के 16 हजार रानियों की बात कही गई है, लेकिन मौजूदा समय में भी संबंधों के नए परिपेक्ष्य सामने आ रहे हैं। अदालत ने कहा कि समाज की नैतिकता से संवैधानिक प्रावधान को नहीं बदला जा सकता और निजता के अधिकार को सरकार समाप्त नहीं कर सकती है। अपनी इच्छा से साथी चुनने के अधिकार को सरकार नियंत्रित नहीं कर सकती है।