घोटाले की पोल खुली

 

(राकेश चौधरी)

मित्रपुरा – उपखंड क्षैत्र बोंली के ग्राम पंचायत उदगांव की ग्राम सेवा सहकारी समिति में हुए गबन को लेकर मामला गरमाया हुआ है।किसानों का कहना है। लगभग एक महीने से ज्यादा समय बीत चूका है ।और उन्हें अभी तक कोई न्याय मिलता नहीं दिख रहा है।ईसी बीच व्यवस्थापक नादान सिंह ने आनन-फानन में किसानों के खातों में डिफरेंस राशि भी जमा करवाई गई हैं।जिससे ये स्पष्ट होता दिखाई दे रहा है कि वास्तव में व्यवस्थापक ने गबन किया है।

यह था मामला:-
पिछले दिनों तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा किसानों का सहकारी बैंकों का ऋण माफ किया गया था, जिसमें ऐसे किसानों का भी ऋण माफ हुआ जिन्होंने यातो कभी ऋण ही नहीं लिया था या फिर उनके द्वारा लिए गए ऋण को ऋण माफी से पहले ही सब्याज चुका दिया गया था।और इस बात का पता किसानों को तब चला जब हाल ही में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार द्वारा पुनः ऋण माफ करने हेतु पूर्व ऋण माफी कि ऋण सूची सूचना बोर्ड पर चस्पा की गई,जिसमें करीब56किसानों के नाम बिना कोई ऋण लिए आए थे, जिसको देख किसानों के होश उड़ गये।

किसानों ने दिए जगह-जगह ज्ञापन:-

उदगांव सहकारी समिति की ऋण माफी सूची में जब उर्ऋण किसानों ने जब अपने नाम देखे तो भौंचक्के रह गए और उन्होंने व्यवस्थापक द्वारा गबन का आरोप लगाया और ईस कार्रवाई हेतु जिला कलेक्टर, उप जिला कलेक्टर व स्थानीय विधायक को ज्ञापन देकर व्यवस्थापक पर कार्यवाही कर किसानों को न्याय दिलवाने कि मांग की।

थाने में भी लगाया इस्तगासा
किसानों ने व्यवस्थापक द्वारा फर्जी तरीके से राशि हडपने को लेकर बोंली थाने में भी व्यवस्थापक के खिलाफ इस्तगासा लगाया है।

प्रधान कार्यालय ने जांच में किया फर्जीवाड़े का खुलासा।

केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रधान कार्यालय ने जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा किया है जिसमें करीब31खाते फर्जी तरीके से खोले गए थे और करीब 21खातों में ऋण राशि बढाकर संधारित की गई थी।जिसको लेकर संचालक बोर्ड को व्यवस्थापक पर कार्यवाही के आदेश दिए गए थे।लेकिन बोर्ड द्वारा नहीं की गई कोई कार्यवाही।

संचालक मंडल एवं व्यवस्थापक कि मिलीभगत कि आशंका।

सरकारी समिति में हुए घोटाले को लेकर संचालक मंडल एवं व्यवस्थापक की मिलीभगत होने की आशंका है, क्योंकि हाल ही में 6मार्च2019 को हुई बैठक में कुछ सदस्यों को छोड़कर सभी संचालक मंडल के सदस्यों ने व्यवस्थापक कि तरफदारी कि और तो और एक सदस्य ने तो अपनी जमीन बेचकर व्यवस्थापक द्वारा किए गए गबन राशि को चुकाने की बात कही।

व्यवस्थापक ने आनन-फानन में जमा करवाई डिफरेंस राशि।
व्यवस्थापक नादान सिंह ने अपने द्वारा किए गए गबन कि राशि जमा करवा दी गई है।जिसमें अपने द्वारा खोले गये 31फर्जी खातों में 1421429 रुपये जमा करवाये और 25 खातों में बढाई गई ऋण राशि 352449 रुपये जमा करवाए गए और कुल17,73,878रुपये के स्थान पर कुल 1850338 रुपये जमाकरवायेऔर ये राशि14,15,16फरवरी2019
को जमा करवाई जा चूकी है।

केंद्रीय सरकारी बैंक मानटाउन सवाईमाधोपुर के एम.डी. ने बताया कि व्यवस्थापक नादान सिंह पर धारा-55 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा रही है ।और इस हेतु डी.आर.ओ. को सूचित किया जा चूका है ।और रिकॉर्ड भी मंगवा लिया गया है।

कैसे खोले गए फर्जी खाते

सहकारी बैंक एम.डी ने बताया कि31खाते फर्जी है, लेकिन बिना पहचान पत्र,फोटो एवं कई
अन्य दस्तावेजों के बिना व्यवस्थापक ने खाते कैसे खोले और अपर शाखा ने उनका सत्यापन कैसे कर दिया।कहीं न कहीं बैंक अधिकारियों कि मिलीभगत भी होने की आशंका नजर आरही है।

व्यस्थापक ने बताई कंप्यूटर कि गलती:-

व्यवस्थापक नादान सिंह का कुछ अलग ही कहना है कि ये गड़बड़ी मेरे द्वारा न होकर कंप्यूटर की गड़बड़ी के कारण हुई है।ईस बात पर उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक किसान के 1540रुपये बकाया है तो कंप्यूटर में गलती से 8लगजाने के कारण 15408/- हो गए और जो पैनल्टी वगैरह जोड़कर और बढ गये।लेकिन जब कंप्यूटर में खराबी के कारण ऐसा हुआ है, तो व्यवस्थापक को अठारह लाख पचास हजार रुपये जमा करवाने की क्या आवश्यकता थी।कंप्यूटर की गड़बड़ी के लिए अपर शाखा को अवगत क्यों नहीं करवाया गया।

उपरोक्त आधार पर कहा जा सकता है कि इस प्रकरण में व्यवस्थापक ने मिलीभगत के सारे प्रकरण को अंजाम दिया जिसको भुगतना भोलेभाले किसानों को पड़रहा है।और व्यवस्थापक से संपर्क करने की कोशिश की गई तो व्यवस्थापक ने कोई जवाब नहीं दिया गया, ईससे स्पष्ट है कि व्यवस्थापक ईस गबन में पूरी तरह जिम्मेदार है।

ईनका यह है कहना-
जब हमने ईस मामले को लेकर एम.डी. से बात की तो  उन्होंने बताया कि”व्यवस्थापक ने वास्तव में गबन किया है और गबन कि गई1773878 रुपये खातों में
14,15,16फरवरी को जमा करवा दी गई है और रिकार्ड मंगवाया गया है जिसके अन्य खातों की जांच एवंम व्यवस्थापक पर कार्यवाही के लिए डी.आर. ओ. सूचित किया गया है।”