पुर्नवास प्रशिक्षण

एंकर——–जोधपुर संभाग स्तरीय आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों का पुनर्वास प्रशिक्षण कार्यक्रम कल से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 3 दिन चलेगा जिसमें आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा मंचन किया जा रहा हे आज दुसरे दिन आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के बारे मे लाइव जानकारी दी गई इस दोरान पंचकर्म के विभागाध्यक्ष ने बताया कि आयुर्वेद से पंचकर्म से असाध्य रोगों को ठीक किया जा सकता है। इस चिकित्सा पद्धति के माध्यम से पांच कर्मों (वमन, विरेचन, वस्ति, रक्तमोक्षण, नस्य) से इलाज किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पंचकर्म चिकित्सा पद्धति केरल में बहुत मशहूर है। अब भारत के बाकी राज्यों में भी इस पद्धति का प्रचार बढ़ रहा है।
उन्होने बताया कि पंचकर्म एक प्रकार की थैरेपी है। आयुर्वेद में शोधन एवं शमन दो प्रकार की चिकित्सा होती है। जिन रोगों से मुक्ति औषधियों द्वारा संभव नहीं होती, उन रोगों के कारक दोषों को शरीर से बाहर कर देने की पद्घति शोधन कहलाती है। पंचकर्म विधि से शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त बनाया जाता है। इससे शरीर की सभी शिराओं की सफाई हो जाती है और शरीर के सभी सिस्टम ठीक से काम करने लगते हैं। पंचकर्म के जरिए रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है। पंचकर्म में तीन तरह से शरीर की शुद्धि की जाती है।

उन्होंने बताया कि इस चिकित्सा पद्धति में मसाज, स्टीम बाथ, कटि-स्नान, फुट मसाज, फेशियल एंड फेस पैक और वेट लॉस पैकेज का प्रयोग करते हैं। इस प्रक्रिया का उपयोग मुख्यत: वात, पित्त, कफ त्रिदोषों को संतुलन में लाने के लिए किया जाता है। मानसिक रोगों व तनाव का शिकार हो चुके लोगों में पंचकर्म सिद्धांत बेहद फायदेमंद होता है। इस पद्धति में हर्बल तेलों और पाउडरों से मसाज द्वारा प्राकृतिक वातावरण में व्यक्ति का उपचार किया जाता है। इसके अलावा कैंसर, घुटने के दर्द, स्पेंडोलाइटिस, मोटापा, सियाटिका, हाई ब्लड प्रेशर, सर्वाइकल कैंसर जैसे असाध्य रोग भी इस चिकित्सा पद्धति से ठीक हो चुके हैं।
जोधपुर से मनोहर सिंह

बाइट :- महेश शर्मा विभाग अध्यक्ष पंचकर्म

बाइट :- महेन्द्र कच्छावा चिकित्सक महात्मा गांधी अस्पताल