जम्मू-कश्मीर में सपना साकार करने चंदा जुटाने पर मजबूर हुई पर्वतारोही

बालाराम शर्मा 

विश्व की सबसे ऊंची पर्वत माउंट एवरेस्ट को फतेह करने की चाह ने कश्मीर की बेटी नाहीदा मंजूर को ऑनलाइन चंदा जुटाने पर मजबूर कर दिया। नाहीदा के अनुसार सरकार की ओर से कोई मदद का आश्वासन नहीं मिला। कुछ प्राइवेट कंपनियां हैं जो आगे आ रही हैं। उम्मीद है कि मैं अपना सपना पूरा कर पाऊंगी।

श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र जेवन के एक मध्यम वर्गीय परिवार की तीन बेटियों में से मंझली बेटी नाहीदा मंजूर (23) दिल में माउंट एवरेस्ट को फतह करने का सपना सजोय बैठी है। उसे सिर्फ उस पल का इंतजार है जब वो माउंट एवरेस्ट पर झंडा फहराएगी। नाहीदा ने बताया कि मैं 10 साल की उम्र से ही ट्रेकिंग करती आई हूं, लेकिन 2017 से मैंने पर्वतारोहण को प्रोफेशनल तरीके से अपनाया। उसने बताया कि मैं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, जम्मू कश्मीर बैंक के पास भी गई थी, लेकिन मुझे अपने सपने को पूरा करने के लिए किसी से मदद नहीं मिली। इसलिए मैंने ऑनलाइन चंदा जुटाने की ठानी।

नाहीदा के अनुसार मेरे इस कदम के उठाने के बाद टीसीआई नामक की एक प्राइवेट कंपनी ने 7.5 लाख स्पांसर करने का आश्वासन दिया है। एक और कंपनी ने मदद की इच्छा जताई है, लेकिन मेरा सपना पूरा होने के लिए करीब 30 लाख रुपये का खर्च है। उम्मीद है कि पैसा जमा हो पाए और एक अप्रैल को काठमांडू से शुरू होने वाले समिट का वो हिस्सा बन पाए। उसने बताया कि अगर वो उस ग्रुप का हिस्सा बन पाती है तो वो कुछ ऐसे भारतीय लोगों में से एक होगी जो नेपाल के दक्षिणी साइड से समिट पर जाएगी, जिसमें करीब 50 दिन का समय लगेगा।

उसने बताया कि फ़िटनेस बनाए रखने के लिए मेरा रोजाना वर्कआउट होता है। मैं सुबह 6 किलोमीटर दौड़ती हूं। वो चाहती है कि पूरा कश्मीर मुझे सपोर्ट करे, क्योंकि मैं कश्मीर की पहली ऐसी लड़की हूं जो माउंटेनियरिंग में आगे बढ़ रही हूं। नाहीदा की बड़ी बहन रोमाना के अनुसार बाकी कई खेल हैं जिनमें लड़कियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन माउंटेनियरिंग में यह कश्मीर की पहली ऐसी लड़की है जो कुछ बड़ा करने जा रही है। मां रजिया अंजुम ने बताया कि मैंने पूरा ध्यान अपने बच्चों पर दिया और हर समय उन्हें सहयोग देती रही। समाज में लोगों ने कई बातें कीं।

माउंटेनियरिंग के सभी कोर्स किए
नाहीदा ने लगभग सभी माउंटेनियरिंग कोर्स कंप्लीट किए हैं। जिनमें नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (एनआईएम) से किया गया बेसिक और एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स, स्पेशल माउंटेनियरिंग कोर्स एंड मेथड्स ऑफ इंसट्रक्शन शामिल है। इसके अलावा उसने अब तक 6001 मीटर की ऊंचाई वाली माउंट देव टिब्बा-मनाली और 5289 मीटर की ऊंचाई वाली हिमाचल प्रदेश की फ्रेंडशिप पीक की भी चढ़ाई की है। कश्मीर में उसने महादेव और माउंट तटाकुटी की भी चढ़ाई की है।

डीसी देंगे चार लाख की वित्तीय सहायता
श्रीनगर के डीसी शाहिद इकबाल चौधरी के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने भी नाहीदा को वित्तीय सहायता देने का आश्वासन दिया है, जिसका जिक्र उन्होंने ट्विटर पर किया। अमर उजाला को उन्होंने फोन बार बताया कि शुरू में 2 लाख देने का फैसला लिया गया है और कोशिश यह की जाएगी कि यह और बढ़े। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि 4 लाख तक की वित्तीय सहायता हो जाए।

दुनिया का सबसे ऊंची पर्वत
माउंट एवरेस्ट 8,848 मीटर (29,029 फीट) ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत है। सर एडमंड हिलेरी और शेरपा तेनजिंग नोर्गे ने 1953 में पहली बार पहाड़ पर विजय प्राप्त की थी। तब से 4,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। सैकड़ों लोग इस दौरान मारे भी गए। पश्चिमी एजेंसी के साथ एवरेस्ट पर चढ़ने के दौरान सामान्य लागत 45,000 डॉलर से अधिक है। एक स्थानीय नेपाली ऑपरेटर के साथ यह खर्च  25,000 और  40,000 डॉलर के बीच हो सकता है। लागत में चोटी के लिए 11,000 डॉलर का परमिट शुल्क शामिल है।