हार्दिक पटेल के कांग्रेस में शामिल होते ही BJP को सताने लगा डर!

अहमदाबाद: हार्दिक पटेल के कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही गुजरात भाजपा में एक मजबूत धारणा घर कर गई है कि वह चुनाव में पटेल वोट खो सकती है। पटेलों के कड़वा और लेउव वर्ण दोनों ही दूसरे सबसे बड़े वोट बैंक हैं और वे 1990 के दशक से भाजपा के साथ हैं। जुलाई 2015 में हार्दिक  पटेल के आरक्षण कोटा आंदोलन शुरू होने के बाद भाजपा पटेल मतदाताओं को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के नेतृत्व में 2015 में भाजपा ने जिला पंचायतों का बहुमत खो दिया। 2017 के विधानसभा चुनावों में हार्दिक पटेल ने भी पार्टी को बुरी तरह से नुक्सान पहुंचाया था और राज्य विधानसभा में इसकी संख्या 117 से घटकर 99 हो गई थी।अब वोटों के और नुक्सान की आशंका से भाजपा ओ.बी.सी. और अन्य गैर-पटेल मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित करती दिख रही है। कांग्रेस के विधायकों का हालिया संकेत स्पष्ट रूप से यह बताता है।

भाजपा में शामिल हुए 5 विधायकों में से 4 गैर-पटेल
भाजपा में शामिल हुए 5 विधायकों में से 4 गैर-पटेल हैं। सभी 4 विधायक सौराष्ट्र से हैं। ज्यादातर पटेल मतदाताओं की निराशा के कारण भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 47 सीटों में से केवल 19 सीटें ही सुरक्षित कर सकी थी। तब से भाजपा के लिए स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है। इस बात की भी चर्चा है कि हार्दिक पटेल के साथ पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) में उनके पूर्व सहयोगी और कांग्रेस विधायक ललित वसोया भी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। यदि ऐसा होता है तो राज्य में ‘पास’ के फिर से उभरने से भाजपा की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। शायद यही कारण है कि भाजपा कांग्रेस विधायक और ओ.बी.सी. नेता अल्पेश ठाकोर को शामिल करने की इच्छुक थी। पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘‘अगर अल्पेश हमारे साथ आते तो हम समीकरणों को संतुलित कर सकते थे।’’ प्रभावशाली पटेल नेताओं को अपनी ओर खींचने के लिए भाजपा पूरी कोशिश कर रही है।

हाल ही में भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस नेता हनुभाई धोरजिया
पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता हनुभाई धोरजिया हाल ही में भाजपा में शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के अपने पिछले दौरे के दौरान पटेल नेताओं द्वारा आयोजित 2 सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों में उपस्थित थे। यह पहली बार नहीं है जब पार्टी ऐसी स्थिति का सामना कर रही है। 2012 के विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के कद्दावर नेता केशुभाई पटेल ने एक नई पार्टी बनाई और भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उस समय यह भी डर था कि पार्टी अपने मजबूत पटेल वोट बैंक को खो देगी लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी ने गैर-पटेल वोटों को रणनीति से अपनी ओर कर बाजी जीती थी। इस बार खासकर जब मोदी की किस्मत दाव पर है तो पार्टी अपने गृह राज्य में एक भी सीट नहीं गंवाना चाहती। वर्तमान में भाजपा की जेब में सभी 26 सीटें हैं।

अमित शाह गांधीनगर से लड़ सकते हैं लोकसभा चुनाव
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर लोकसभा सीट से चुुनाव लड़ सकते हैं। फिलहाल इस सीट से भाजपा के वरिष्ठतम नेता लाल कृष्ण अडवानी सांसद हैं। 91 वर्ष की उम्र हो जाने के कारण उनके इस बार चुनाव लडऩे की संभावना नहीं दिखती है। ऐसे में अमित शाह गुजरात की राजधानी गांधीनगर सीट से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की सभी 26 सीटें जीत ली थीं। यदि मोदी इस बार गुजरात से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ते हैं तो मोदी की जगह इस बार शाह के रूप में पार्टी के राष्ट्रीय चेहरे के रूप में पार्टी कार्यकत्र्ताओं का मनोबल काफी ऊंचा रहेगा। 55 वर्षीय शाह फिलहाल गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं। शाह देश भर में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। साथ ही वह मुख्य रणनीतिकार हैं। ऐसे मेंं उनका लोकसभा चुनाव लडऩा काफी अहम माना जा सकता है। भाजपा के लिए गांधीनगर लोकसभा सीट काफी सुरक्षित सीट है।

भाजपा के गढ़ में मोदी लहर नहीं, कांग्रेस को मिला आधार 
कांग्रेस गुजरात को हारे हुए प्रदेश के रूप में नहीं देख रही है। अगर ‘पॉलिटिकल एज’ सर्वे के नतीजों का आकलन किया जाए तो कांग्रेस की उम्मीदें बेमानी नहीं हैं। ये सर्वे गुजरात के 26 लोकसभा क्षेत्रों में पडऩे वाले सभी 182 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। सर्वे के मुताबिक कांग्रेस को 10 जबकि भाजपा को 16 संसदीय क्षेत्रों में बढ़त है। सर्वे का अनुमान है कि भाजपा को राज्य में करीब 50 फीसदी वोट मिलेंगे जबकि कांग्रेस को 43 प्रतिशत। 2017 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो दोनों पार्टियों के वोट शेयर लगभग इतने ही थे। 2014 आम चुनावों के मुकाबले भाजपा के वोट शेयर में 10 प्रतिशत की कमी आई है और कांग्रेस के वोटों में लगभग इतना ही इजाफा हुआ है। सर्वे के मुताबिक लोकसभा चुनाव में 6 सीटों पर कांग्रेस, भाजपा की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर सकती है। ये सभी सीटें ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ती हैं। इनमें 3 सीटें सौराष्ट्र क्षेत्र में, 2 उत्तरी गुजरात में और एक दक्षिणी गुजरात में है।

‘पॉलिटिकल एज’ ने ऐसे किया सर्वे
यह सर्वेक्षण 10 राज्यों के सभी विधानसभा क्षेत्रों में फरवरी में किया गया था। हर विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर अनियमित तरीके से चुनकर 50 व्यक्तियों का इंटरव्यू किया गया।