रिश्तेदार के नौकर के नाम से खड़ी की 15 करोड़ रु. की बेनामी प्रोपर्टी, 149 प्लॉट अटैच

गर्वित श्रीवास्तव        

जोधपुर आयकर विभाग ने दिल्ली स्थित एक हॉस्पिटल में मामूली नौकरी करने वाले व्यक्ति के नाम पर खरीदी गई करीब 15 करोड़ रु. की 149 संपत्तियों व तीन बैंक अकाउंट को भी प्रोविजनल रूप से अटैच किए हैं। जोधपुर के तनावड़ा इलाके में बजरंग विहार योजना में 24 बीघा 1 बिस्वा जमीन पर ये भूखंड काटे गए थे।

ये प्रोपर्टी शास्त्री नगर निवासी बिल्डर दिलीप सिंघवी की है। सिंघवी ने अपने विश्वासपात्र के नाम पर यह प्रोपर्टी खड़ी की थी। जांच में सामने आया कि तनावड़ा में अक्टूबर 2012 से नवंबर 2013 के दौरान 8 अलग-अलग रजिस्टर्ड बेचान पत्रों के जरिए उप्र के बस्ती निवासी रामजियावन के नाम से अनुसूचित जाति की कुल 24 बीघा जमीनें खरीदी गई। इन्हें खरीदने के लिए रामजियावन के नाम से 1.64 करोड़ का निवेश किया गया।

इसमें 1.45 करोड़ नकद व 19 लाख रु. चैक से दिए गए। रजिस्ट्री खर्च 13.37 लाख का भी नकद भुगतान किया गया। जांच में रामजियावन के नाम से न तो पैन कार्ड मिला न आयकर रिटर्न का ब्योरा। जांच में पता चला कि रामजियावन ने दिलीप सिंघवी के रिश्तेदार के दिल्ली स्थित एक हॉस्पिटल में लंबे समय तक काम किया है।

भू-रूपांतरण के लिए दो व्यक्तियों के नाम से जेडीए में लगाई फाइल
बेनामी संपत्ति निषेध यूनिट ने प्रोपर्टी के बारे में तहकीकात की, तो सामने आया कि नवंबर 2016 में इन 24 बीघा 1 बिस्वा जमीनों में से 3 बीघा 14 बिस्वा जमीनों का विक्रय पत्र जगदीश पंवार के नाम से रजिस्टर्ड करवाया गया था। पूरी जमीन का भू-रूपांतरण कराने के लिए जोधपुर विकास प्राधिकरण में रामजियावन और जगदीश पंवार के नाम से संयुक्त प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। इस काम के लिए संदीप डारा के माध्यम से जेडीए में 1 करोड़ 5 लाख रुपए जमा करवाकर 149 भूखंड की कॉलोनी काटी गई थी।
जेडीए का नियम विरुद्ध कन्वर्जन
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 के अनुसार अनुसूचित जाति की भूमि का विक्रय केवल प्रदेश का अनुसूचित जाति का व्यक्ति कर सकता है। फिर भी जमीन उप्र के रामजियावन के नाम से रजिस्टर्ड हुई। जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने नियम विरुद्ध कन्वर्जन किया।