हो गया विवाद का पटाक्षेप, निगम ने स्टेशन के बाहर दुकानों के सामने लगाई रेलिंग को हटाया

युधिष्ठिर भूदंड 

जोधपुर. नगर निगम ने सोमवार को आखिरकार रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रशासन की ओर से दस दुकानों के बाहर लगाई गई रेलिंग को हटा दिया। इससे करीब दो माह से जारी विवाद का भी पटाक्षेप हो गया। साथ ही आंदोलन कर रहे दुकानदारों को राहत मिली है। तीन दिन पूर्व निगम ने रेलवे प्रशासन को नोटिस जारी कर उसकी सम्पति पर बनी दुकानों के आगे अवैध रूप से लगाई गई रेलिंग को हटाने को कहा था। इस नोटिस की अवधि आज समाप्त होते ही निगम ने जेसीबी की सहायता से दुकानों के बाहर लगाई गई छह फीट ऊंची रेलिंग को गिरा दिया।

रेलवे स्टेशन के बाहर बनी दस दुकानों के आगे रेलवे ने 27 जनवरी को यह कहते हुए छह फीट ऊंची रेलिंग लगा दी कि इन दुकानों के कारण स्वच्छता में देश के नंबर एक चुने गए जोधपुर रेलवे स्टेशन परिसर में गंदगी फैलती है। इसके बाद से लगातार दुकानदारों व रेलवे प्रशासन में ठन गई। निगम यह साबित नहीं कर पा रहा था कि ये दुकानें उसकी है।

इसको लेकर दुकानदारों ने भी कोर्ट में याचिका लगा रखी है। सड़क पर अधिकार को लेकर रेलवे व नगर निगम अपना पक्ष रख चुके हैं। अब कलेक्टर का पक्ष जानने के बाद अदालत अपना फैसला करेगी, लेकिन विवाद के बाद निगम प्रशासन दावा कर चुका है कि दुकानों के आगे सड़क पर जहां रेलवे ने लोहे की रेलिंग लगाई है, उसका क्षेत्राधिकार निगम के अधीन हैं।

हालांकि इस मामले में भास्कर ने 28 जनवरी को ही निगम की बही से 51 साल पुराना एक पत्र ढूंढ निकाला था। यह पत्र 22 जुलाई 1968 को तत्कालीन नगर परिषद के प्रशासक एआर भंडारी ने तत्कालीन नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष लक्ष्मणराज कल्ला को लिखा था। पत्र में तय शर्तों में दुकानों की योजना, निर्माण, उस पर खर्च होने वाली राशि और दुकानों का स्वामित्व सब कुछ स्पष्ट लिखा हुआ है। पत्र में इस बात का भी उल्लेख है, कि इन दुकानों का स्वामित्व (मिल्कियत) नगर परिषद का ही रहेगा। निगम की ओर से स्वामित्व जांच करवाई गई। रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज खसरा नंबर 443 व 444 की जांच की तो सड़क का स्वामित्व निगम का ही पाया गया।

उल्लेखनीय है, कि रेलवे स्टेशन के बाहर नगर निगम की किराए पर दी गई 14 दुकानों के आगे रेलवे प्रशासन द्वारा 27 जनवरी की आधी रात आरपीएफ व जीआरपी के जवानों को तैनात कर छह फीट ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी थी। इस मामले का दुकानदारों ने विरोध भी किया, लेकिन रेलवे के जवानों ने दुकानदारों को खदेड़ दिया था।