सबरीमाला बनाम भाजपा की सीट, मंदिर को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश

लोकसभा चुनाव में संघ परिवार के कई नेता केरल में भाजपा के लिए सबरीमाला मंदिर मुद्दे को भुनाने में जुटे हैं। यद्यपि भाजपा खुलकर सबरीमाला मंदिर के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाने के पक्ष में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे हिंदुओं के पक्ष में यद्यपि भाजपा सहित दूसरे प्रमुख दल भी खड़े नजर आ रहे हैं लेकिन चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट चेतावनी है कि सबरीमाला मंदिर मुद्दे पर भावनायें भड़काने आयोग कार्रवाई कर सकता है। बावजूद इसके संघ परिवार के केरल से जुड़े नेता इस मुद्दे का चुनाव में फायदा उठाने की कोशिश में जुट गये हैं।

संघ नेताओं का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर राज्य के हिंदू मतदाताओं का ध्रुवीकरण होता है तो भाजपा तीन से चार लोकसभा सीटों पर फायदा मिलेगा। संघ के लोग 1987 की तर्ज पर इस बार माहौल खड़ा करना चाहते हैं जब हिंदू मन्नानी मुद्दा गरमाकर भाजपा तीन विधानसभा सीटों पर पहली बार राज्य में मुख्य संघर्ष में आने में सफल हुई थी। भाजपा ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट तथा कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फंड को कड़ी टक्कर दी थी। सूत्रों का दावा है कि यद्यपि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस बार सबरीमाला को चुनावी मुद्दा बनाने के खिलाफ था। उनका तर्क था कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण दांव केरल जैसे राज्य में उल्टा भी पड़ सकता है। लेकिन संघ परिवार के लोग हिंदुओं के ध्रुवीकरण के लिए तिरुवनंतपुरम, अतिंगल, पथानामथिट्टा व त्रिशूर क्षेत्र में दिन रात एक किए हुए हैं।

केरल की बीस सीटों में से इन्हीं क्षेत्रों में भाजपा के लिए सबसे अधिक संभावना देखी जा रही है।  इस बीच सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह के द्वार पर सोने के पत्तर भी चढ़वा दिया गया है। संघ की ध्रुवीकरण की नीति के तहत प्रमुख भाजपा समर्थक राजशेखरन को मिजोरम के राज्यपाल के पद से छुट्टी कर केरल में चुनाव प्रचार के लिए लगाया गया है। सबरीमाला तथा अर्नामुला के लिए राजशेखरन के काम गो देखते हुए वे हिंदुओं तक आसानी से अपनी पहुंच बना सकेंगे। चुनावमें भाजपा इसका पूरा फायदा उठाना चाहती है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हर उम्र की महिलाओं को सबरी माला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दिए जाने के खिलाफ अधिकांश हिंदुओं में नाराजगी को भांपते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी अपना स्टैंड बदलते हुए ‘इंतजार को तैयार’ आंदोलन का समर्थन कर दिया है। इस आंदोलन के तहत हिंदू महिलाओं के समूह ने मंदिर में प्रवेश के लिए 50 वर्ष की उम्र तक इंतजार का समर्थन करती है। तिरुअनंतपुरम में 66.9 फीसदी हिंदू मतदाता हैं जिनमें से अधिकांश सवर्ण नैय्यर और ब्रह्मण हैं। दोनों ही समाज के लोग सबरीमाला मुद्दे पर पुरातनपंथी मान्यताओं के साथ हैं। ऐसा माना जा रहा है कि सबरीमाला मुद्दे का भाजपा को फायदा जरूर मिलेगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीधरन पिल्लई के अनुसार सबरीमाला को लेकर नीतिगत मामलों पर बोलने की चुनाव में कोई मनाही नहीं है। हम इसी मुद्दे पर राज्य की वाम सरकार की खामियों की पोल खोलेंगे। सबरीमाला के मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले हमारे लोग अभी भी जेलों में बंद हैं। सीपीएम भी इस मुद्दे पर बहस चाहती है। सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य एम.ए.बेबी के अनुसार सबरीमाला मुद्दे पर भाजपा को कांग्रेस का दोहरा मापदंड है।

क्या है मुद्दा
सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्थानीय परंपरा को मानने वाले हिंदू विरोध कर रहे हैं। मंदिर में सिर्फ अधिक उम्र की महिलाओं को ही प्रवेश दिया जाता है। भाजपा व कांग्रेस दोनों इस मामले में जनता के साथ खड़ी हैं।