बदहाल सड़कें, बढ़ रहे सड़क हादसे, नेताआें को नहीं फिक्र

साक्षी सूदन 

जम्मू,  राज्य में हर साल सैकड़ों लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में चली जाती है। विशेषतौर पर दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में खस्ताहाल सड़कें और तेह रफ्तार हादसों का कारण अधिक बनती हैं। परंतु इनके प्रति कभी प्रशासन व संबधित विभागों ने संजीदगी नहीं दिखाई। यही कारण है कि राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में भी ऐसे मुद्दे जगह नहीं बना पाते हैं।

जम्मू-कश्मीर सड़क हादसों के मामलों में देश में दूसरे स्थान पर आता है। हादसों में मध्य प्रदेश और सिक्किम ही दो ऐसे राज्य हैं जहां पर जम्मू कश्मीर से अधिक सड़क हादसे होते हैं। यह दोनों राज्य संयुक्त रूप से नंबर एक पर है। जम्मू कश्मीर में औसतन हर साल 900 लोगों की सड़क हादसों में मौत होती हैं जो कि आतंकवादी गतिविधियों में मरने वालों से भी अधिक हैं। पिछले साल राज्य में करीब पांच हजार सड़क हादसों में 926 लोगों की मौत हुई थी। इतनी बड़ी संख्या में सड़क हादसों के दो ही प्रमुख कारण हैं। एक अधिक संख्या में वाहन सड़कों पर चलना और दूसरा खस्ताहाल सड़कें। राज्य में पिछले साल डेढ़ लाख के करीब नए वाहन सड़कों पर आए। सरकार ने सड़क हादसों पर रोक लगाने के लिए रोड सेफ्टी काउंसिल का भी गठन किया है। परंतु इसका भी कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी पहले की तरह ही सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। एक सप्ताह में ही सड़क दुर्घटनाओं में पंद्रह लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले रामबन के चंद्रकोट में ही 11 लोगों की माैत हो चुकी है।