यात्री का 20 हजार रुपए का मोबाइल गुमा, शिकायत करने पहुंचा तो जीआरपी ने सागर का रास्ता दिखाया

शिरीष सिलकारी 

आदर्श रेलवे स्टेशन दमोह में स्थित जीआरपी सहायता केंद्र में यात्रियों की सुविधा के लिए एक एएसआई, एक हेडकांस्टेबल,दो कांस्टेबल और 12 अज्ञात लठैत तैनात हैं, मगर यहां पर यात्रियों की सुनने वाला कोई नहीं है। मोबाइल गुमने की शिकायत करने सागर तक जाना पड़ता है। कुछ इसी तरह का वाक्या बुधवार को चौकी में हुआ।

दमोह के बजरिया वार्ड निवासी विनोद ठाकुर का बीती रात बीना से मालखेड़ी के बीच पैसेजर ट्रेन में 20 हजार रुपए का मोबाइल गुम गया। वे बीना से दमोह आ रहे थे। उन्होंने सुबह 10 बजे दमोह की जीआरपी सहायता केंद्र में जाकर यह बात बताई तो ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल महेश कोरी ने उन्हें सागर में जाकर एफआईआर कराने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि यहां पर कंप्यूटर नहीं है। इसलिए आवेदन नहीं लिया जा सकता।

इस बात पर आवेदक ने आपत्ति जताई तोे उसकी बात नहीं सुनी गई। आवेदक की सूचना पर भास्कर प्रतिनिधि सहायता केंद्र पहुंचा तो थाना में पदस्थ स्टाफ ने पीड़ित की फोटो लेने पर आपत्ति जताई और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। मोबाइल छीनने का प्रयास भी किया।

इस स्थिति से सागर जीआरपी थाना प्रभारी बृजेंद्र मिश्रा,स्टेशन मास्टर एससी अग्रवाल, आरपीएफ थाना प्रभारी अनिल सिंह और सहायता केंद्र के एएसआई बीएन सिंह को अवगत कराया है।

मासूम से दुष्कर्म के बाद उठा था सवाल-अगस्त 2018 में रेलवे स्टेशन परिसर जलसा के पास एक ढ़ाई साल की बालिका के साथ दुष्कर्म की वारदात हुई थी, पूरे प्रदेश में मामला छाया था, मगर इसके बाद भी जबलपुर में बैठे वरिष्ठ अधिकारियोें ने कोई निर्णय नहीं लिया। न तो स्टाफ बदला और न ही कोई कार्रवाई की। हाल ही में दो माह पहले जीआरपी सहायता केंद्र के पास खंडर भवन में 12 साल की एक किशोरी के साथ फिर दुष्कर्म की वारदात हुई। चौकी में स्टाफ था, मगर किसी ने तुरंत एफआईआर नहीं की, दूसरे दिन जबलपुर से आए अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज की।