ये कैसा डर, 150 साल से इन पांच गांव ने नहीं खेली होली

ऋषिराज शर्मा 

रायगढ़, । वर्तमान समय में एक ओर जहां लोग पुरानी परंपराओं को तोड़ते हुए आधुनिक जीवनशैली को आत्मसात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर कई गांवों के ग्रामीण अपनी पूर्वजों द्वारा स्थापित मान्यताओं का सम्मान करते हुए रीति निति का पालन कर रहे हैं। जिला मुख्यालय से 86 किलोमीटर दूर ओडिशा से लगे बरमकेला तहसील में वनांचल गांव है हट्टापाली, छिंदपतेरा, मंजूरपाली, जगदीशपुर व अमलीपाली। यहां पिछले 150 साल से लोगों ने होली नहीं मनाई।

पांचों गांव की आबादी लगभग 1500 है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार होली पर्व के दौरान एक खुंखार जंगली शेर गांव के गौंटिया को उठा ले गया। इसके दो दिन बाद गांव के बैगा को किसी बड़ी अनहोनी का सपना आया, उन्हें चेतावनी दी गई कि होली मनाने पर भयंकर अनिष्ट होगा। बैगा ने यह बात ग्रामीणों को बताई और ग्रामीणों ने बैगा की बात मानते हुए गांव में होली नहीं मनाने का संकल्प लिया। यह कहानी बुजुर्ग अपने नाती-पोतों को सुनाते रहे और होली नहीं मनाने की परंपरा चल गई।

ग्राम हट्टापाली निवासी आशाराम सिदार के उसके गांव समेत आसपास के पांच गांवों में पिछले लगभग 150 साल से यहां पर न तो होलिका दहन किया जाता है और नहीं एक दूसरे को रंग लगाया जाता है। गांव में न गुलाल उड़ता है न बच्चे पिचकारी और मखौटे का आनंद उठाते हैं। गांव में फाग और नगाड़े पर भी प्रतिबंध है। गांव के अन्य बुजुर्गों का कहना है कि उन्हें यह नहीं मालूम है कि कब से होली नहीं मनाई जा रही, जब से उन्होंने होश संभाला है किसी को होलीमनाते नहीं देखा सूना। पूछने पर यह जरूर बताते हैं कि दशकों पहले गांव में होलिका के दिन पास के जंगल से आया एक खुखार शेर गांव के गौटिया को उठा ले गया था। अब भी यहां के लोगों के रंग खेलने की इच्छा पर अनहोनी का भय हावी है।

दादा-परदादा के जमाने से गांवों में होली नहीं मनाते हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि होली के दिन गांव के गौटिया को बाघ उठा ले गया था। इसके बाद बैगा को गांव में अनिष्ट की चेतावनी देते हुए होली नहीं मनाने कहा गया था तब से गांव में होली नहीं मनाई जाती है। -अनन्दमति नायक सरपंच हट्टापली

पुराने समय में होली के दिन अनहोनी हुईथी, जिसके बाद से यहां होली नहीं मनाई जाती है। अब मैं 86 वर्ष की हूं लेकिन कभी गांव में किसी को रंग पर्व मनाते नहीं देखा। -सुनन्दा चौहान ग्राम हट्टापाली बुजुर्ग