जातीय समीकरण के दम पर बाजी मार ले गए शेखावत, पिछड़ गए जसवंत विश्नोई

युधिष्ठिर भूदंड 

जोधपुर. लोकसभा चुनाव के लिए जोधपुर संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी चयन करने के लिए भाजपा के पास बहुत सीमित ऑप्शन थे। प्रत्याशी चयन में पार्टी ने सिर्फ जोधपुर ही नहीं आसपास की कई अन्य सीटों के जातीय समीकरण साधने का प्रयास किया। इसके दम पर बाजी गजेन्द्र सिंह शेखावत मार ले गए और दमदार प्रत्याशी के रूप में उभरे पूर्व सांसद जसवंत सिंह विश्नोई पिछड़ गए

सूत्रों का कहना है कि भाजपा की तरफ से कराए गए विभिन्न सर्वे में शेखावत की स्थिति बहुत मजबूत नहीं मानी गई। इन सर्वे में विश्नोई मजबूती के साथ उभर कर सामने आए। जोधपुर के जातीय समीकरण भी विश्नोई के पक्ष में नजर आ रहे थे। जोधपुर संसदीय क्षेत्र के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से तीन विधायक विश्नोई है। ऐसे में विश्नोई की दावेदारी मजबूत मानी जाने लगी। इसके बाद शेखावत को राजसमंद से चुनाव लड़ाने की चर्चा होने लगी।

जोधपुर से राजपूत जाति के प्रत्याशी का टिकट काटने पर पार्टी को पूरे क्षेत्र के जातीय समीकरण गड़बड़ाते हुए नजर आने लगे। राजपूत समाज भाजपा से नाराज चल रहा है। जोधपुर से समाज के व्यक्ति का टिकट काटे जाने पर पूरे समाज को गलत संदेश जाता। साथ ही पार्टी जोधपुर से राजपूत समाज के व्यक्ति का टिकट काट उसे आसपास की अन्य सीटों पर समाहित करने की स्थिति में नहीं थी। बाड़मेर-जैसलमेर, पाली, जालोरी-सिरोही, नागौर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, सीकर, चुरू व झुंझुनूं तक एक भी जगह राजपूत समाज का प्रत्याशी अमूमन नहीं होता है। ऐसे में पार्टी ने काफी सोच-विचार कर जसवंत सिंह विश्नोई को दरकिनार कर शेखावत पर भरोसा जताया।