कपिल सिब्बल का तंज- चायवालों को भूले मोदी, अब याद आ रहे हैं चौकीदार

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान पर तंज कसते हुए कहा है कि मोदी ‘चायवालों’ को भूलकर अब ‘चौकीदारों’ को याद कर रहे हैं और राजनीतिक लाभ के लिए ‘अगले चुनाव’ में किसी और पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मोदी पर बालाकोट हवाई हमले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए पूछा कि गुरदासपुर, पठानकोट, उरी, बारामूला और पुलवामा में जब हमले हो रहे थे तो क्या चौकीदार सो रहा था। भाजपा का ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान कांग्रेस के आरोप ‘चौकीदार चोर है’ के जवाब में शुरू किया गया है। सिब्बल ने कहा कि सबसे पहले तो यह चाय बेचने वालों (चायवालों) के बारे में भूल चुके हैं। अब वह चौकीदारों को याद करते हैं। अगली बार कोई और होगा क्योंकि वह चौकीदारों को भी भूल जाएंगे। राज्यसभा के 70 वर्षीय सदस्य सिब्बल ने एक साक्षात्कार में कहा कि दुखद बात यह है कि जब गुरदासपुर, पठानकोट, उरी, बारामूला, पुलवामा में हम पर हमला हुआ तब वह ‘सो’ रहे थे।

मणिशंकर अय्यर का ‘चायवाला’ 2014 में बना अभियान
2014 के लोकसभा चुनाव में ‘चायवाला’ शब्द उस समय केंद्र में आ गया था जब कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मोदी को ‘चायवाला’ बताया था। तब भाजपा ने मोदी को ‘चायवाला’ बताते हुए व्यापक चुनाव प्रचार इसलिए किया था ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ पाए। इसके बाद से खुद मोदी कई बार खुद को चायवाला बता चुके हैं।

राहुल का चौकीदार बना मुहिम
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘चौकीदार चोर है’ कहकर लगातार निशाना साधा है। वह नरेंद्र मोदी पर राफेल लड़ाकू विमान सौदे के मामले में भ्रष्टाचार और पक्षपात का आरोप लगाते हुए, बार-बार ‘चौकीदार चोर है’ कहते रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिब्बल ने मोदी पर बालाकोट हवाई हमले से राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। सिब्बल ने कहा कि उन्होंने (भाजपा ने) पहली बार सार्वजनिक बयान देकर इसे (हवाई हमले को) राजनीतिक रंग दिया। जब वह (मोदी) भाषण दे रहे थे तो उनके पीछे शहीदों के पोस्टर लगे हुए थे। वह हवाई हमले का जिक्र करते हुए कह रहे थे कि जनता का मूड अब अलग है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि आम लोगों का जीवन जिन मुद्दों से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है उन पर सरकार कम ध्यान दे रही है जैसे कि किसानों की समस्याएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, भूख, ऋण सुविधाएं और कारोबार का ‘चौपट’ हो जाना।

जब भागा नीरव और चोकसी कहां था चौकीदार
सिब्बल ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘चौकीदार’ अभियान की आलोचना करते हुए पूछा कि जब नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे लोग देश से भाग रहे थे तब ‘चौकीदार’ क्या कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चौकीदार उस समय क्या कर रहे थे जब हवाई हमले के बाद सीमा पर रहने वाले लोगों की और सैनिकों की जान जा रही थी। क्या वह अपने घर के चौकीदार हैं या अपनी सुविधाओं के।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री से यह पूछा गया कि क्या बालाकोट हवाई हमले के बाद रोजगार और सरकार द्वारा आर्थिक क्षेत्र में कथित तौर पर खराब प्रदर्शन से जनता का ध्यान हट गया? इस पर उनका कहना था कि ऐसा करने की कोशिशें की गई थी। उन्होंने कहा कि पुलवामा के बाद अब पूरी बातचीत इस पर आ गई है कि सरकार ने कितना अच्छा काम किया। और हमने पाकिस्तान को दिखाया कि हम सीमा पार से हवाई हमले करने में सक्षम हैं अगर वह आतंकवादी हमलों के जरिए भारत को अस्थिर करने की कोशिश करते हैं तो…।

कोई संस्था मोदी राज में सुरक्षित नहीं
सिब्बल ने कहा कि निजी तौर पर पाकिस्तान को जो संदेश दिया गया, वह उसे सही मानते हैं लेकिन इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना स्वीकार्य नहीं है। 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने एक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण ठिकाने पर पाकिस्तान के भीतर बालाकोट के निकट 26 फरवरी को बमबारी की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री से जब यह पूछा गया कि क्या कांग्रेस यह मानती है कि यह चुनाव कांग्रेस के लिए ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ या ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति वाला है क्योंकि कांग्रेस भाजपा पर संस्थाओं को बर्बाद करने का आरोप लगा रही है। सिब्बल ने इस पर सीबीआई की ‘भीतरी कलह’ और मध्यरात्रि में सीबीआई के निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाए जाने का हवाला देते हुए कहा कि संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक राफेल सौदा मामले में पारर्दिशता के साथ काम नहीं कर रहे हैं। सिब्बल ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि कौन-सी संस्था मोदी सरकार के भीतर सुरक्षित रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया को देखें…ऐसा लगता है कि मीडिया ‘गोदी मीडिया (लैप डॉग)’ हो गया है और सभी संस्थाएं सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने नतमस्तक हैं। और अब सिर्फ खाली संवैधानिक ढांचा बच गया है, जिसकी मूल भावना खो चुकी है। सिब्बल ने कहा कि इसलिए, मेरा मानना है कि अगर हम देश में उदारवादी ताकतों की जीत सुनिश्चित नहीं कर पाए तो हम एक बड़े संकट में होंगे।