आर्थिक तंगी के कारण रुके कदम, बाल वैज्ञानिक नहीं जा पाएंगे रूस

पार्थो चक्रवर्ती 

बिलासपुर,  गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद देश का ऐसा पहला सरकारी स्कूल है, जहां के तीन बाल वैज्ञानिकों के चार आविष्कारों का चयन रूस के मास्को शहर में होने वाले इंटरनेशनल रोबोटिक चैम्पियशिप के लिए नीति आयोग ने किया है। मास्को में दुनियाभर के 32 आविष्कारों का प्रदर्शन होना है। इसमें सरकारी स्कूल के बाल वैज्ञानिक रूस में स्मार्ट खेती को लेकर अपने महत्वाकांक्षी आविषकार का प्रदर्शन करते। अफसोस की बात ये कि आर्थिक तंगी के चलते नीति आयोग के टॉप फाइव में जगह पाने के बाद भी अब ये बाल वैज्ञानिक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने रूस नहीं जा पाएंगे। अचरज की बात ये कि कलेक्टर से लेकर विधायक, एनटीपीसी व एसईसीएल प्रबंधन ने भी आर्थिक मदद के लिए रुचि नहीं दिखाई है।

नीति आयोग ने सरकारी स्कूल के तीन बाल वैज्ञानिकों के चार प्रोजेक्ट को टॉप फाइव में जगह देने और इंटरनेशनल रोबोटिक चैम्पियनशिप में शामिल करने के साथ ही रूस जाने के लिए कुल खर्च की 40 फीसदी राशि गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य के नाम बैंक खाते में जमा करा दी थी। शेष राशि का इंतजाम स्कूल प्रबंधन को अपने स्रोत से करने की शर्त रखी थी। इंटरनेशनल रोबोटिक चैम्पियनशिप में मास्को आने जाने और वहां ठहरने के लिए 10 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। नीति आयोग ने 40 फीसदी राशि दे दी है। लिहाजा 6 लाख 99 हजार रुपये की जरूरत और पड़ेगी। स्कूल प्रबंधन ने कलेक्टर डॉ.संजय अलंग,नगर विधायक शैलेष पांडेय के अलावा एसईसीएल व एनटीपीसी प्रबंधन को पत्र लिखकर रूस जाने के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी।अचरज की बात ये कि किसी ने भी बाल वैज्ञानिकों के प्रतिभा को निखारने के लिए मास्को जाने आर्थिक मदद करने में रुचि नहीं ली । इतनी बड़ी रकम का इंतजाम न होने के कारण बाल वैज्ञानिक रूस जाने से वंचित हो गए हैं। जानकारी के अनुसार नीति आयोग ने स्कूल प्रबंधन व एटीएल इंचार्ज को सोमवार 25 मार्च तक पूरी जानकारी देने कहा था। राशि का इंतजाम होने के बाद इस संबंध में सहमति पत्र जमा करने कहा था। स्कूल प्रबंधन ने आर्थिक तंगी को कारण बताते हुए बाल वैज्ञानिकों को रूस भेजने में अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए नीति आयोग को उनके द्वारा दी गई 40 फीसदी राशि वापस लौटा दी है।