मरम्मत के लिए शुरू हुआ क्लोजर, जोधपुर सहित अन्य शहरों में जलापूर्ति के लिए किया भंडारण

युधिष्ठिर भूदंड 

जोधपुर. प्रदेश के रेगिस्तानी जिलों की लाइफ लाइन मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर में मंगलवार से मरम्मत करने के लिए एक माह के लिए बंद कर दी गई। अब 24 अप्रेल तक इस नहर से पानी नहीं आएगा। पंजाब में राजस्थानी फीडर की मरम्मत इस दौरान की जाएगी। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर में क्लोजर के दौरान जलापूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी एकत्र कर लिया गया है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इंदिरा गांधी नहर पॉडिंग कर 550 एमसीएफटी पानी जोधपुर के लिए आरक्षित रखा गया है। इसी तरह जोधपुर के प्रमुख जलाशयों कायलाना व तखत सागर में भी 330 एमसीएफटी पानी संग्रहित है। वहीं कुछ पानी सूरपुरा में भी एकत्र किया गया है। इसके अलावा राजीव गांधी लिफ्ट नहर के साथ बनी डिग्गियों को भी पूरी क्षमता तक भर दिया गया है। जोधपुर शहर में रोजाना करीब 15 एमसीएफटी पानी वितरित किया जाता है। इसके अलावा कुछ पानी जिले के ग्रामीण क्षेत्र में भी वितरित किया जाता है। जलदाय विभाग का कहना है कि मुख्य नहर के क्लोजर की अवधि के लिए पानी का भरपूर भंडारण कर लिया गया है। ऐसे में किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

राजस्थान की जीवन रेखा है यह नहर
राजस्थान के लिए जीवन रेखा बन चुकी यह नहर वास्तव में अपने आकार व लम्बाई के कारण एक नदी के समान है। नहर पंजाब के फिरोजपुर के निकट सतलज व ब्यास नदी के संगम पर बने हरिके बैराज से शुरू होती है। देश की सबसे लम्बी यह नहर 649 किलोमीटर लम्बी है। इसमें से पंजाब से राजस्थान तक 204 किलोमीटर फीडर नहर है। वहीं 445 किलोमीटर मुख्य नहर है। राजस्थान की सीमा पर इस नहर की गहराई 21 फीट व तल की चौड़ाई 134 फीट व सतह 218 फीट चौड़ी है। हनुमानगढ़ के मसीतावाली से लेकर जैसलमेर के मोहनगढ़ तक फैली मुख्य नहर से नौ शाखाएं निकलती है। सिंचाई के लिए इसकी वितरिकाएं 9,245 किलोमीटर लम्बी है। राजस्थान के दस रेगिस्तानी जिलों के लोगों के हलक इस नहर के पानी से तर होते है। इसके अलावा कई बिजली परियोजनाओं के लिए भी पानी यहीं नहर उपलब्ध कराती है। कभी पानी को तरसने वाला रेगिस्तान पूरी तरह से बदल चुका है। हरियाली से आच्छादित रेगिस्तानी क्षेत्र में अब पूरा परिदृश्य बदल चुका है।