पिस्टल मिलती तो अलीगढ़ जेल में दोहराया जाता बागपत कांड

अलीगढ़  आगरा का कुख्यात बिल्लू वर्मा अलीगढ़ जेल में बागपत कांड दोहराने की तैयारी में था। शुक्र रहा कि साजिश सफल न हुई। बागपत जेल में पश्विमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात सुनील राठी ने पिछले वर्ष पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी थी। इसी तर्ज पर शातिर बिल्लू भी होली पर जेल के अंदर सपा नेता के भतीजे के हत्याभियुक्त की हत्या करने की साजिश रच रहा था। बंदी रक्षक से मोबाइल हासिल करने के बाद वह अपने गुर्गों के माध्यम से पिस्टल अंदर मंगवाने की कोशिश में था, मगर सफल नहीं हो सका। हत्याभियुक्त के पिता ने इस संबंध में एसएसपी, डीजीपी व शासन को पत्र भेजकर सुरक्षा मांगी है।

यह है मामला
सिविल लाइंस क्षेत्र निवासी सपा नेता सगीर अहमद के भतीजे आदिल की हत्या अगस्त- 16 को केला नगर चौराहे पर हुई थी। इसमें आरोपित ककराला (बदायूं) थाना क्षेत्र के गांव अलापुर निवासी समीर खान अलीगढ़ जेल में निरुद्ध है। समीर के पिता औसाफ खान ने अपने पत्र में कहा है कि विरोधी गुट ने सिपाही नरेंद्र भदौरिया के जरिए शार्प शूटरों को एक करोड़ की सुपारी दी गई थी। बिल्लू को हत्या करनी थी। सिपाही जेल में मोबाइल पहुंचा चुका था, इसके बाद पिस्टल पहुंचाकर होली पर बेटे की हत्या की साजिश रची गई। लेकिन पिस्टल पहुंच नहीं सकी। सर्विलांस टीम ने मोबाइल पर हुई शार्प शूटरों की बातचीत सुनी थी। तब 19 मार्च को एसटीएफ ने जेल में छापा मारा। बता दें कि बिल्लू ने इसी मोबाइल से आगरा के प्रमुख सर्राफ आनंद अग्रवाल से पांच लाख की चौथ मांगी थी।

चेहरा रंगकर करता है हमला
पूछताछ में ये भी सामने आया कि बिल्लू की योजना होली पर पूरा चेहरा रंगने के बाद समीर को गोली मारने की थी। इससे कि रंगे हुए चेहरे के चलते आसानी से किसी की पहचान में नहीं आता। चार माह पूर्व ये साजिश रची गई थी।

मथुरा के मनीष ने दिया मोबाइल
पूछताछ में बिल्लू ने बताया कि उसके साथ रोहित नाम का बंदी निरुद्ध है। रोहित की दोस्ती मथुरा के मनीष से है। रोहित के जरिए मनीष से 17 मार्च को मोबाइल मंगवाया था। मनीष ने जेल के बाहर सिपाही नरेंद्र को मोबाइल दे दिया था। जिसे सिपाही ने उस तक पहुंचाया।

आचार संहिता बनी रोड़ा
जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि समीर और बिल्लू को अलग-अलग बैरक में रखकर निगरानी बढ़ा दी है। इनमें से एक को दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाना था। लेकिन आचार संहिता के चलते शिफ्टिंग की प्रक्रिया लंबी है। इसके लिए शासन को लिखा जाएगा, चुनाव आयोग की अनुमति भी लेनी पड़ेगी।