50 करोड़ की धोखाधड़ी, 20 से ज्यादा लोगों के बयान, डॉ. पुनीत को आज होना पड़ेगा पेश

नीलू सोनी 

रायपुर . दाऊ कल्याण सिंह डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मशीनों की खरीदी में 50 करोड़ की धांधली और भर्ती में अनियमितता की जांच के दौरान अब तक 20 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें परचेस कमेटी में शामिल डॉक्टर, वेंडर व पूर्व अधीक्षक के करीबी भी शामिल हैं। पुलिस पूछ रही है कि खरीदी व भर्ती में गड़बड़ी के लिए क्यों न आपकी भूमिका की जांच हो? पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता को बुधवार को बयान के लिए बुलाया गया है। डा. अपना पक्ष रखने के लिए हाजिर नहीं हुए तो उनके खिलाफ वारंट जारी होने के संकेत हैं। डा. गुप्ता का बयान सबसे अहम इसलिए है, क्योंकि सारी भर्ती और खरीदी की प्रक्रिया उन्हीं के माध्यम से हुई है। हालांकि ज्यादातर दस्तावेजों में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों के अनुमोदन के हस्ताक्षर हैं। जांच में ये भी सामने आया है कि कुछ मशीनों की खरीदी भर्ती के लिए उच्च स्तर पर प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली। उसके बावजूद खरीदी की गई। अभी तक की पूछताछ में पर्चेस कमेटी से जुड़े ज्यादातर डॉक्टरों ने अपने बयान में पुलिस को बताया है कि उनकी खरीदी में ज्यादा भूमिका नहीं है। उन्होंने केवल मशीनों की खासियत व ये बताया कि वह जरूरी क्यों है? उनकी भूमिका केवल इतनी ही जानकारी देने तक सीमित थी। कौन सी मशीन खरीदनी है? इसका निर्णय अधीक्षक व बड़े अधिकारियों ने लिया था।टेंडर की प्रक्रिया सरकारी एजेंसी सीजीएमएससी के माध्यम से की गई थी। कुछ डॉक्टरों ने दबी जुबान स्वीकारा कि उन्हें खास कंपनी की मशीन खरीदी के पेपर में हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने हस्ताक्षर भी कर दिए, पर मशीन किस कीमत पर खरीदी गई? अधिकारियाें काे कमीशन मिला अथवा नहीं? इस बारे में वे स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कह सकते। पूछताछ के दौरान कुछ डाक्टरों ने ये जरूर कहा है कि उन्होंने कमीशन की चर्चा सुनी थी। मशीनों की खरीदी के लिए बनी पर्चेस कमेटी में चिकित्सा शिक्षा कार्यालय के सलाहकार, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी, नेफ्रोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर व प्लास्टिक सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर थे। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि कमेटी के सदस्य केवल डमी थे। पूरा निर्णय अधीक्षक व दूसरे अधिकारियों ने लिया। कमेटी के सदस्यों को जो कहा जाता, वे मजबूरी में करते रहे।