8वीं बार भी बेहोश करने में विफल रहे तो प्रसूता को ऑपरेशन थिएटर से ही बीएमसी रैफर कर दिया

शिरीष सिलकारी 

जिला अस्पताल के गायनी विभाग में सीजर करने के लिए ऑपरेशन थिएटर ले जाई गई एक प्रसूता महिला को जब डॉक्टर 8 मर्तबा के प्रयास के बाद भी बेहोश नहीं कर पाए तो उसे ओटी से ही बीएमसी रैफर कर दिया गया। प्रसूता को ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी नहीं की गई। परेशान परिजन जैसे-तैसे निजी साधन से उसे बीएमसी लेकर गए। यहां करीब 8 घंटे बाद रात 10.30 बजे सीजर ऑपरेशन हुआ। प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया है। दोनों स्वस्थ बताए गए हैं।

जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग के बीच फिर रैफर का खेल शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार सेमराबाग निवासी सुनील दुबे ने 25 वर्षीय प|ी प्रियंका दुबे को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार की रात करीब 3 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह प्रियंका की पहली डिलेवरी थी। यहां डॉक्टरों ने दोपहर 12 बजे तक नार्मल डिलेवरी होने का इंतजार किया। इसके बाद अचानक ऑपरेशन की नौबत बताकर ऑपरेशन थिएटर में ले गए। यहां करीब 2 घंटे के दौरान डॉक्टरों ने करीब 8 मर्तबा रीढ़ की हड्‌डी में इंजेक्शन लगाकर प्रसूता को बेहोश करने का प्रयास किया। लेकिन जब काफी प्रयास के बाद भी बेहोश नहीं कर पाए तो ऑपरेशन थिएटर के अंदर से ही उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रैफर कर दिया।

परिजन अनिल दुबे ने बताया कि जब अस्पताल प्रबंधन को बीएमसी रैफर ही करना था तो रात में ही कर देते। कम से कम साधन जुटाने के लिए परेशान तो नहीं होना पड़ता। फिर जब दूसरे दिन रैफर किया तब ही 108 सेवा के जरिए एंबुलेंस की सुविधा दिला दी जाती।

जननी एक्सप्रेस के स्टाफ को 10 कदम चलने से भी परहेज

दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल के बाहर खड़ी जननी एक्सप्रेस गाड़ी क्रमांक एमपी 04 डीबी 1974 के स्टाफ से प्रसूता को बीएमसी ले जाने के लिए कहा तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। उनका कहना था कि वह एक मरीज को जिला अस्पताल लेकर आए थे। उसे वापस लेकर जाना है। इसलिए इस मरीज को जिला अस्पताल से बीएमसी नहीं ले जा सकते। इस संबंध में जिगित्सा के जिला प्रभारी तबरेज खान का कहना है कि मरीज के परिजनों ने कॉल सेंटर पर सूचना नहीं दी होगी। इसलिए उन्हें सुविधा नहीं मिली। स्टाफ बिना केस असाइन हुए नहीं ले जा सकता।

Ãमरीज की पीठ की हडि्डयां काफी टेढ़ी थीं। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र खरे ने काफी प्रयास किया लेकिन एनेस्थीसिया नहीं दिया जा सका। हाथ से एनेस्थीसिया देने की व्यवस्था में काफी वक्त लग जाता। हम लोग नार्मल डिलेवरी के इंतजार में काफी वक्त खर्च कर चुके थे। केस बेहद गंभीर न हो पाए, इस कारण पास के पास बीएमसी में रैफर कर दिया था। – डॉ. नीना गिडियन, प्रभारी डफरिन अस्पताल सागर

एक दिन में हुए 7 सीजर : डॉ. गिडियन ने बताया कि मंगलवार को सुबह से दोपहर 12 बजे तक करीब 7 प्रसूता महिलाओं के सीजर ऑपरेशन किए गए हैं। प्रियंका दुबे का 8वां केस था। सातों ऑपरेशन छोटी-मोटी परेशानियों के बाद सफलतापूर्वक कर लिए गए। सिर्फ प्रियंका के मामले में एनेस्थीसिया देने में परेशानी आई।