पार्टी को एकजुट करने में BJP सफल, आगे राह आसान नहीं

नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी को एकजुट करने की कोशिशों में तो प्रदेश भाजपा भले ही कुछ सफल होती दिख रही है। लेकिन आप और कांग्रेस के गठजोड़ के कयास समाप्त होने के कारण चुनावी राह आसान नहीं होगी। खुद पार्टी के कई पदाधिकारी भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि यदि आप और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ें तो भाजपा के लिए जीत का मार्ग पूरी तरह से स्पष्ट होगा। यहां तक कि सातों सीटों पर फिर से भाजपा को जीत मिल सकती है।

कांग्रेस और आप के बीच अब तक नहीं सका गठबंधन 
दरअसल कांग्रेस और आप के बीच अब तक गठबंधन को लेकर कोई ठोस नीति पर बात तय नहीं हो सकी है। बताया जाता है कि दोनों पार्टियों के आला नेताओं ने भी अब साफतौर पर गठबंधन को लेकर किसी भी तरह की संभावना से लगभग इंकार कर दिया है। ऐसे में अब चुनावी प्रचार से लेकर रणनीति किस तरह से तय की जाए, इस पर भाजपा ने मंथन शुरू कर दिया है। मंगलवार को इस सिलसिले में बैठक भी बुलाई गई है। बताया जाता है कि इस बैठक में पार्टी दिल्ली की सीटों पर किस तरह से प्रचार को तेज करेगी और किन-किन इलाकों में विपक्षी दलों के खिलाफ अपनाए जाने वाले मुद्दों के साथ-साथ पार्टी केंद्र की उपलब्धियों के बारे में बताएगी, इस पर विशेषतौर पर चर्चा की जाएगी।

पार्टी में प्रत्याशियों के नाम को लेकर संशय बरकरार 
उल्लेखनीय है कि अभी पार्टी में प्रत्याशियों के नाम को लेकर संशय बरकरार है। कई मौजूदा सांसदों का टिकट कटने की चर्चाएं जोरों पर है, वहीं यह भी माना जा रहा है कि संभावित प्रत्याशियों में से किसी का भी चयन सभी मानक को ध्यान में रखते हुए किया जाए। ताकि पार्टी फिर से अपनी जीत सातों सीटों पर दोहराने में कामयाब हो सके। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के अनुसार यदि आप और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ते तो जनता के बीच जाने पर उन्हें खुद अपनी स्थिति का अंदाजा हो जाता कि झूठ की राजनीति जनता को स्वीकार नहीं है। यदि दोनों पार्टियां मिलकर लड़ें तो भाजपा के लिए चुनाव आसान होगा।

चांदनी चौक में वैश्य बिरादरी का  रहेगा दबदबा
टिकट भले ही किसी को भी मिले, लेकिन तय माना जा रहा है कि चांदनी चौक सीट पर भाजपा की ओर से वैश्य समुदाय के किसी प्रत्याशी को चुनाव में उतारा जाएगा। अब तक की तैयारियों और पार्टी आला कमान के रवैये से प्रतीत होता है कि केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को इस सीट पर फिर से लड़ाया जा सकता है। हालांकि यह चर्चा जोरों पर है कि केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को इस सीट से हटाकर दूसरी सीट पर मौका दिया जा सकता है। ऐसे में चांदनी चौक सीट पर संभावितों की लिस्ट में वरिष्ठ भाजपा नेता सुधांशु मित्तल और संसदीय मंत्री विजय गोयल एवं नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता को लेकर चर्चा जोरों पर है।

नई दिल्ली से इस बार लेखी का लडऩा थोड़ा असंभव 
भाजपा ने नई दिल्ली से पार्टी की वरिष्ठ नेता व मौजूदा सांसद मीनाक्षी लेखी के स्थान पर किसी अन्य को चुनाव में उतारने का मन लगभग बना लिया है। पार्टी के केंद्रीय सूत्रों के अनुसार मौजूदा सांसदों के कार्य व रिपोर्ट कार्ड के आधार पर उन्हें दोबारा चुनाव में उसी सीट से लड़ाने का निर्णय लिया जाएगा। यदि यही सच है तो फिर आंकड़ों के आधार पर मीनाक्षी लेखी की रिपोर्ट कार्ड पर पहले ही सवाल उठाया जा चुका है। पार्टी ने उन्हें बदलने का मन बना लिया है, यह इस बात से भी साबित होता है कि पिछली बार केंद्रीय समिति के समक्ष भेजे गए नामों में नई दिल्ली के संभावितों में क्रिकेटर गौतम गंभीर और वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा के नाम न होने पर केंद्रीय समिति की फटकार भी प्रदेश नेतृत्व को लगी थी।

कुछ चेहरे जिन्हें लेकर पार्टी में भी नहीं है कोई ठोस राय
पार्टी के उत्तर-पश्चिमी दिल्ली सीट से डॉ.उदित राज हों या फिर पश्चिमी दिल्ली से प्रवेश वर्मा हों या दक्षिणी दिल्ली सीट से मौजूदा सांसद हों, इन्हें हटाया जाएगा अथवा बरकरार रखा जाए। इसे लेकर फिलहाल कोई ठोस राय पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की ओर से और न ही केंद्रीय नेतृत्व ने अब तक बनाई है। माना जा रहा है कि उदित राज के कार्य में कोई खास खामी पार्टी नेतृत्व को नहीं दिखी है। वहीं पश्चिमी व दक्षिणी दिल्ली में भी स्थानीय जाति से संबंधित सांसद होने का लाभ उन्हें फिर से प्रत्याशी बनवा सकता है। लेकिन चर्चा यह है कि यदि नई दिल्ली से पार्टी ने लेखी को हटाकर किसी पुरुष को टिकट दिया तो फिर यह इसका असर उत्तर-पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली में से किसी पर अवश्य पड़ सकता है।

नवरात्र पर जारी हो सकती है दिल्ली के प्रत्याशियों की सूची
भाजपा के दिल्ली में लोकसभा प्रत्याशियों की सूची में प्रदेश नेतृत्व ने 21 से बढ़ाकर 31 नाम केंद्रीय चुनाव समिति के समक्ष सुपुर्द कर दिए हैं। बताया जाता है कि समिति इस नई सूची पर गौर कर रही है। माना जा रहा है कि पहले नवरात्र तक केंद्रीय नेतृत्व की ओर से दिल्ली प्रदेश के सातों प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। हालांकि इससे पहले नाम घोषित किये जाने को लेकर कई बार तिथियां बदली जा चुकी हैं। प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी का भी मानना है कि पांच अप्रैल तक या उसके आस-पास प्रत्याशियों के नाम का ऐलान केंद्रीय समिति की ओर से हो सकता है। दरअसल अब तक पार्टी कांग्रेस व आप के बीच गठबंधन को लेकर निगाह लगाए हुए थी, पार्टी ऐसे प्रत्याशियों को उतारना चाहती है जो गठबंधन के प्रत्याशियों पर भारी साबित हो।