उधर RJD में बागियों की उम्मीद बने तेज प्रताप, इधर नोटिस तक नहीं ले रहा लालू परिवार

अनुज श्रीवास्तव 

पटना । राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव बगावत के रास्ते पर लंबी दूरी तय कर पाएंगे, इसमें सबको संदेह है। फिर भी टिकट के मामले में राजद के वंचित उनकी ओर उम्मीद से देख रहे हैं। संयोग यह भी है कि ये वंचित अपने इलाके में वोटरों के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं। यह प्रभाव उनकी जीत के लिए काफी नहीं है, लेकिन राजद उम्मीदवार की हार के कारण जरूर बन सकते हैं। इस बीच बड़ी खबर यह है कि परिवार ने अब तेज प्रताप यादव को उनके हाल पर छोड़ दिया है। कोई उनकी नोटिस नहीं ले रहा है।

लालू परिवार में मचा सियासी घमासान

विदित हो कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में सियासी घमासान मच गया है। परिवार में बागी तेवर अपनाए लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने लालू-राबड़ी मोर्चा बना चार सीटों के लिए अपने उम्‍मीदवारों की घोषणा कर दी है। साथ ही 20 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार उतारने की बात कही है। उन्‍होंने पार्टी के अधिकृत प्रत्‍याशी व अपने ससुर चंद्रिका राय के खिलाफ खुद मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है। तेज प्रताप ने अपनी पत्‍नी व चंद्रिका राय की बेटी ऐश्‍वर्या राय के खिलाफ तलाक का मुकदमा दायर कर रखा है। तेज प्रताप की इस बगावत का फायदा पार्टी के बागी भी उठाना चाह रहे हैं।

सीतामढ़ी के पूर्व सांसद सीताराम यादव के बागी होने की बात महागठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार अर्जुन राय को परेशान कर रही है। सीताराम उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जिन्होंने मुखिया से लेकर संसद तक का सफर किया है। वे प्रखंड प्रमुख, विधायक और सरकार के मंत्री भी रहे हैं। वे बागी बनते हैं तो राजद के वोट को मामूली तौर पर ही सही, प्रभावित जरूर करेंगे।

दरभंगा में मौके की तलाश कर रहे फातमी

दरभंगा के पूर्व सांसद मो. अली अशरफ फातमी ने अभी चुनाव लडऩे के बारे में तय नहीं किया है। वे मोल-भाव कर रहे हैं। करीबी कहते हैं कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के जरिए मुकेश सहनी से उनकी बातचीत चल रही है। समर्थक उन्हें चुनाव लडऩे के लिए ललकार रहे हैं। 63 साल के फातमी में पांच साल और इंतजार करने का धैर्य नहीं है। हां,फिलहाल वे मधुबनी सीट के लिएउम्‍मीदवार की घोषणा काइंतजार कर रहे हैं।