ट्रिब्यूनल में 3 साल से सदस्य ही नहीं, 10 सैनिक तो न्याय की आस में दम तोड़ चुके

मीनाक्षी पारीक 

जयपुर  आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) सैनिकों और उनके परिजनों को समय रहते न्याय दिलाने में नाकाम साबित हो रहा है। जयपुर स्थित एएफटी की क्षेत्रीय बेंच में पिछले करीब तीन साल से न्यायिक और प्रशासनिक सदस्य नहीं होने से करीब 4300 मामले अटके हुए हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि 10 सैनिक तो दुनिया ही छोड़ गए, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। एएफटी में औसतन हर माह 80 से 100 नए केस दायर होते हैं। लेकिन सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण यह ट्रिब्यूनल केवल सर्किट बेंच के सहारे चल रहा है। सर्किट बेंच में एक माह में केवल पांच दिन सुनवाई होती है, जो इतने केसों को देखते हुए नाकाफी है।
एएफटी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल एसपी सिंह का कहना है कि उन्होंने खाली पदों पर नियुक्ति के लिए विधि व न्याय विभाग राज्य सरकार व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कई बार प्रतिवेदन दिया है, लेकिन नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। वहीं अधिवक्ता दीपक चौहान का कहना है कि देश की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों न्याय में विलंब के कारण अपने सेवा संबंधी अधिकारों से भी वंचित हैं।

उल्लेखनीय है कि जयपुर एएफटी का गठन 22 जून, 2009 को हुआ था। 29 जुलाई 2016 से इसमें न्यायिक सदस्य का पद खाली हो गया। इसके कुछ माह बाद ही प्रशासनिक सदस्य का पद भी खाली हो गया।  एएफटी की प्रिंसिपल बेंच नई दिल्ली में है। जयपुर बेंच को सेना की थल, वायु व जल सेना से जुड़े केसों में सुनवाई का अधिकार है। जोधपुर में भी एएफटी की सर्किट बेंच जोधपुर क्षेत्राधिकार के केसों की सुनवाई करती है।