लक्ष्मीबाईनगर मंडी में बोली कम लगाने को लेकर भिड़े किसान और व्यापारी

तेजकरण (राजू) मोर्या

इंदौर. लक्ष्मीबाईनगर अनाज मंडी में पिछले दस दिनों में यह दूसरी बार है, जबकि किसान और व्यापारियाें के झगड़े में नीलामी बंद करनी पड़ी है। बुधवार सुबह भी लगभग नौ बजे मंडी में जब किसान गेहूं की आवक लेकर पहुंचे तो व्यापारियों ने नीलामी शुरू की। इस दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि व्यापारी उनकी उपज का कम दाम लगा रहे हैं।इस पर व्यापारियों ने कह दिया कि यही सही दाम है। अगर वे बेचना चाहते हैं तो ठीक अन्यथा अपनी उपज को वापस ले जा सकते हैं। इस पर किसान भड़क गए और हंगामा करने लगे। इसके बाद व्यापारियाें ने भी इसका विरोध करते हुए काम बंद कर दिया।

किसान और व्यापारियों के बीच में उपज की कम बोली लगाने को लेकर बुधवार सुबह विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने हंगामा कर दिया। इससे काम बंद होने के साथ मंडी और परिसर के बाहर जाम की स्थिति निर्मित हो गई। दोनों पक्षों में विवाद की जानकारी मिलने पर कृषि उपज मंडी समिति सचिव सतीश पटेल और एरोड्रम थाने का पुलिस बल पहुंच गया। इनके अलावा मंडी के अन्य अफसरों ने भी किसानों और व्यापारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अफसराें की एक ना सुनी।

किसानों का कहना था कि व्यापारी जानबूझकर किसानों के अच्छे माल का भी कम दाम लगाते हैं। इससे उनकी फसल की मूल लागत भी नहीं निकल पाती है। वहीं, व्यापारियों का कहना था कि जिन किसानों का माल अच्छा होता है उसके लिए तो भाव ज्यादा ही रहते हैं, लेकिन जिन किसानों का माल अच्छा नहीं रहता है उनके लिए भी किसान ऊंचा दाम लगाने की जिद करते हैं। ऐसे में कई दफा मंडी में विवाद होते रहते हैं। इसी के चलते बुधवार सुबह भी दोनों पक्षों में विवाद हो गया। लगभग ढ़ाई घंटे तक दोनों पक्ष अपनी बात मंडी प्रशासन से मनवाने को लेकर अड़े रहे। उसके बाद मामला शांत हो सका।

अफसरों के नीलामी में नहीं रहने से होती है परेशानी
लक्ष्मीबाईनगर मंडी के व्यापारियों ने मंडी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसान अक्सर माल की बिक्री को लेकर कम दाम लगाने का आरोप लगाते हुए विवाद करते हैं। इस दौरान अगर मंडी प्रशासन की ओर से कोई अफसर नीलामी में मौजूद रहे तो इस तरह के विवादों को रोका जा सकता है। वहीं, कई दफा इस तरह के विवाद होने के बावजूद मंडी प्रशासन इसको गंभीरता से नहीं लेता है और उसका खामियाजा व्यापारियों को उठाना पड़ता है। इस दौरान मंडी बंद होने सेे हजारों रुपए का नुकसान भी उठाना पड़ता है।