भूमि के अभाव में 441 आवास का निर्माण एक साल से अटका, अब आचार संहिता के बाद होगा

आरती शर्मा 

लहार नगर में आवासहीन परिवारों को पक्के मकान मुहैया कराने की कवायद पिछले एक साल से चल रही है। इसके लिए नगर परिषद प्रशासन ने 866 गरीब हितग्राहियों के आवास मंजूर किए हैं। जिनमें 441 परिवार ऐसे हैं, जिनके पास खुद का भूखंड नहीं है। इन्हें प्रशासन अभी तक मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा सका है। वहीं जिन 425 परिवारों के आवास बनाए जा रहे हैं वह दूसरी तथा तीसरी किस्त नहीं मिलने से भंवर में लटक गए हैं। हितग्राही भूखंड प्राप्त करने के लिए पिछले एक साल से नप अधिकारियों के चक्कर काटते नहीं थक रहे हैं। इस संबंध में जब सीएमओ महेश पुरोहित से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आचार संहिता के बाद उक्त हितग्राहियों को भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए प्रशासन ने नगर में जमीन तलाश ली है।

नगर में एक भी आवास कंप्लीट नहीं

लहार नगर में कुल 866 लोगों के आवास मंजूर किए गए थे। जिनमें अभी तक एक भी मकान बनकर कंप्लीट नहीं हुआ है। निर्माणाधीन आवासों में किसी की दूसरी तो किसी की तीसरी किस्त नहीं मिली है। लोग जब समस्या लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पहुंचते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि पहले मकान का कार्य बताए गए अनुदेशों के अनुरूप किया जाएगा, उसके बाद ही आगे के निर्माण के लिए किस्त जारी की जाएगी। मालूम हो कि फाउंडेशन तक पहली, दीवारों की चिनाई के साथ छत डलने पर दूसरी और प्लास्टर पर तीसरी किस्त हितग्राहियों को जारी करनी होती है। ऐसे में नगर में मंजूर किए गए सभी आवास अधर में लटक गए हैं। क्योंकि शासन ने इन हितग्राहियों के खाते में किस्त नहीं डाली हैं।52 परिवारों को आवंटित किए आवास: आलमपुर में नगर परिषद द्वारा दो साल पहले 52 परिवारों के आवास मंजूर किए गए थे। यह आवास समय पर किस्त नहीं मिलने के कारण आज भी अधूरे हैं। इस संबंध में जब नगर परिषद सीएमओ अशोक सिंह यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आवास की तीसरी किस्त उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो छत डालकर रंगाई-पुताई का काम पूरा कर लेंगे। लेकिन समस्या यह है कि लोगों ने पहली और दूसरी किस्त में फाउंडेशन तैयार कर चिनाई का काम पूरा कर लिया है। लेकिन आगे की किस्त जारी नहीं होने से ज्यादातर आवासों का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि कुछ लोगाें ने कर्ज लेकर आवास बनवा लिए हैं।