कुल्लू में हर साल बढ़ रहा है सड़क हादसों का ग्राफ, कई लोगों की थम चुकी हैं सांसें

मीनाक्षी भारद्वाज 

कुल्लू,  सड़क दुर्घटनाएं रोकने के सरकार के दावे कुल्लू जिला में हवा-हवाई हो रहे हैं। जिला कुल्लू में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है और इन हादसों में कई लोगों की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी हैं। इन हादसों में जहां कहीं खुद वाहन चालकों की लापरवाही लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है तो कहीं सरकार और विभाग की अनदेखी के कारण सड़कों की खस्ता हालत अनमोल जीवन लील रही है।

पिछले ढाई साल के पुलिस के आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए तो जिला कुल्लू में 2017 में 168 जबकि वर्ष 2018 में 203 सड़क हादसे हो चुके हैं। 2019 में 31 मार्च तक 38 सड़क हादसों ने लोगों की जिंदगी लील ली है। इन सड़क हादसों में पिछले ढाई साल में 185 लोग काल का ग्रास बन चुके हैं जबकि 676 लोग मरते-मरते बचे हैं।

कुल्लू जिला की सड़कों की यदि बात की जाए तो हर जगह सड़कें दम तोड़ती नजर आ रही हैं और यही कारण है कि सड़कों की खस्ताहालत के कारण जिला सहित प्रदेश व अन्य राज्यों के कई लोग जान गंवा चुके हैं। इन सड़क हादसों के सरकार और प्रशासन की ओर से हर बार ही बड़े-बड़े वादे व घोषणाएं की जातीपिछले एक साल में यातायात पुलिस ने 89398 लोगों के चालान काटे हैं। सड़कों पर हैं गड्ढे लगघाटी में सफर करना भी किसी जोखिम से कम नहीं है। हालांकि लोगों की सुविधा के लिए सरकार की ओर से सड़कें तो बना दी गई हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण सड़कों की खस्ताहालत के चलते घाटी की सड़कों पर सफर खौफनाक है।

हालांकि कुल्लू पुलिस की ओर से जिला के वाहन चालकों को समय-समय पर यातायात नियमों के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है, बावजूद इसके साल दर साल सड़क हादसों के आंकड़ों में इजाफा हो रहा है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने के कारण अभी तक सड़क हादसों में कई लोग जान गवां चुके हैं

और कई घायल हुए हैं। बावजूद इसके अभी भी लोग बेखौफ ट्रैफिक नियमों की सरेआम उल्लंघना करने से नहीं मान रहे है।

जिला पुलिस की ओर से वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति समय-समय पर जागरूक किया जाता है। इसके अलावा नियमों की अवहेलना करने वालों पर भी नकेल कसी जा रही है और समय-समय पर चालान भी काटे जाते हैं।

-शालिनी अग्निहोत्री, पुलिस अधीक्षक कुल्लू।