जम्‍मू-कश्‍मीर: सेंट्रल जेल में गैस सिलेंडरों में धमाके कर भागने की थी कोशिश, 3 सुरक्षाकर्मी घायल

राजेन्द्र भगत 

श्रीनगर। सेंट्रल जेल श्रीनगर में कैदियों ने बीती रात हिंसा, आगजनी व गैस सिलेंडरों से चार धमाके कर जेल तोड़कर भागने की कोशिश की, जिसे पुलिस व सुरक्षाबलों ने नाकाम बना दिया। हिंसक कैदियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को लाठियों और आंसूगैस का सहारा लेना पड़ा। रातभर चला हंगामा शुक्रवार सुबह पूरी तरह शांत हो गया, लेकिन इस दौरान दो कैदियों व तीन सुरक्षाकर्मियों समेत पांच लोग जख्मी हो गए। दो बैरक, एक रसोईघर और एक टीन का शेड पूरी तरह तबाह हो गया। सीसीटीवी व सेंसर क्षतिग्रस्त हो गए। लाखों रुपये की संपत्ति नष्ट हुई है।

इस घटना के बाद जेल में पुलिस व अर्धसैनिकबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने जिला उपायुक्त श्रीनगर को पूरे मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है। पुलिस ने भी एक एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं इस घटना के पीछे किसी बड़ी साजिश से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।पुलिस व संबंधित अधिकारियों ने बवाल के कारणों का ज्यादा खुलासा नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ यही कहा है कि जेल में कुछ बैरकों की मरम्मत हो रही है और इसी कारण कुछ कैदियों को जब उनकी बैरकों से दूसरी बैरकों में स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया तो हंगामा शुरू हुआ। कैदियों को लगा कि उन्हें श्रीनगर से बाहर जम्मू की जेलों में स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने अपनी बैरकों से निकलने से मना करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जो कुछ ही देर में हिंसा में बदल गई थी।सूत्रों ने बताया कि जेल में जमात-ए-इस्लामी और जेकेएलएफ के कई नेता और कार्यकर्ता भी बंद हैं। श्रीनगर जेल से जमात व जेकेएलएफ के कई नेताओं को जम्मू की जेलों में स्थानांतरित किया गया है। इसलिए जब बीती शाम कैदियों को बैरकें बदलने के लिए कहा गया तो उन्हें लगा कि उन्हें कश्मीर से बाहर भेजा जा रहा है। भड़के कैदियों ने आजादी समर्थक नारेबाजी करते हुए जेलकर्मियों के साथ मारपीट कर शुरू कर दी। इसी दौरान कुछ कैदियों ने गैस सिलेंडर व अन्य ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल करते हुए जेल के सुरक्षा चक्र को तोड़ने का प्रयास किया। जेल की 10 बैरकों में से 400 से ज्यादा कैदी और बंदियों ने जेल के भीतरी दरवाजों को तोड़ दिया। उन्होंने जेल तोड़कर भागने के लिए बाहरी गेट और दीवारों को भी गैस सिलेंडर से धमाके कर तोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने गेट और दीवारों के कोनों पर चार बड़े धमाके किए।यह बवाल रात करीब नौ बजे शुरू हुआ था। जेल में दंगे की खबर मिलते ही डीआइजी सेंट्रल कश्मीर रेंज, एसएसपी श्रीनगर हसीब मुगल और जिला उपायुक्त श्रीनगर डॉ. शहिद इकबाल चौधरी व अन्य अधिकारी अपने दल बल समेत मौके पर पहुंच गए, लेकिन कैदियों ने वहां परिसर में रखी गई निर्माण सामग्री पर कब्जा करते हुए पुलिस अधिकारियों पर भी हमले का प्रयास किया। दमकल विभाग की गाडिय़ों के जरिए तेज पानी की बौछारें छोड़ हिंसक कैदियों पर काबू पाने का प्रयास किया गया, लेकिन इससे बात नहीं बनने पर सुरक्षाबलों ने लाठियों और आंसूगैस का भी सहारा लिया। कैदियों को लाउड स्पीकर पर बार-बार शांत हो अपनी बैरकों में लौटने के लिए कहा गया। लेकिन रातभर पथराव चलता रहा जो आज सुबह किसी तरह रोका गया।

जिला उपायुक्त श्रीनगर शाहिद इकबाल चौधरी ने हिंसा पर उतारू कैदियों और बंदियों के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते हुए उन्हें समझाया कि जब तक हंगामा चलता रहेगा। इसके बाद हिंसा रुकी और बातचीत शुरू हुई। जिला उपायुक्त ने सभी कैदियों को अपनी अपनी बैरकों को जाने के लिए कहा और उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया। बताया जाता है कि जेल में व्यवस्था बहाल करने के बाद जिला उपायुक्त श्रीनगर व अन्य संबधित अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी, पीएचई और पीडीडी के अधिकारियों की अंतर विभागीय टीमों को गठित कर उन्हें जेल में हुए नुकसान का जायजा लेकर उसकी मुरम्मत शुरू करने को कहा।

वादी के विभिन्न हिस्सों में तनाव

जेल में हुए हंगामे के बाद श्रीनगर समेत वादी के विभिन्न हिस्सों में तनाव पैदा हो गया है। जेल में बंद कैदियों, विचाराधीन कैदियों के परिजनों ने उनसे मुलाकात का मौका देने के लिए प्रशासन पर जोर देना शुरू कर दिया है। इन लोगों का कहना है कि जेल में बंद उनके परिजनों के साथ मारपीट की गई है, उनकी जान को खतरा है। अलबत्ता, पुलिस ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि सिर्फ दो कैदी मामूली रूप से जख्मी हुए हैं।

प्रशासन ने एहतियातन लगाई निषेधाज्ञा

सेंट्रल जेल में हंगामे के बाद प्रशासन ने आसपास के इलाकों के साथ दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा व शोपियां में भी एहतियात के तौर पर निषेधाज्ञा लागू कर दी। इसके साथ ही इन इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवा को भी सीमित कर दिया गया। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि जेल में बंद कैदियों में अधिकांश दक्षिण कश्मीर और श्रीनगर के आस-पास के इलाकों के ही रहने वाले हैं। इसलिए यह कदम एहतियातन उठाया गया है।