बाड़मेर-जैसलमेर में भाजपा ने कैलाश चौधरी पर खेला दांव, समय पूर्व नौकरी छोड़ना रास नहीं आया महेन्द्र सिंह को

गर्वित श्रीवास्तव 

जोधपुर. कई दिन की मशक्कत के बाद आखिरकार शनिवार दोपहर भाजपा ने बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। पार्टी ने बायतु के पूर्व विधायक कैलाश चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया है। सीमावर्ती रेगिस्तानी इस संसदीय क्षेत्र में अब कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह व कैलाश चौधरी के बीच मुकाबला होगा। कई दिन पूर्व टिकट मिलने से कांग्रेस प्रत्याशी का जनसंपर्क अभियान गति पकड़ चुका है। जबकि कैलाश चौधरी के समक्ष इतने बड़े संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं से कम समय में संपर्क साधने की बड़ी चुनौती होगी।

बाड़मेर-जैसलमेर से कैलाश चौधरी के अलावा पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम व भारतीय पुलिस सेवा से त्यागपत्र देकर महेन्द्र सिंह चौधरी भी टिकट की दौड़ में शामिल थे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे महेन्द्र सिंह की पैरवी कर रही थी।  जबकि चार बार सांसद रह चुके कर्नल सोनाराम अपने अनुभव व क्षेत्र में अच्छे संपर्क के दम पर टिकट के प्रबल दावेदार थे। टिकट की इस दौड़ में महेन्द्र सिंह चौधरी सबसे आगे माने जा रहे थे, लेकिन हनुमान बेनीवाल की पार्टी के साथ भाजपा का गठबंधन होने के बाद हालात बदल गए। बेनीवाल यहां से कर्नल सोनाराम या कैलाश चौधरी में से किसी एक को टिकट देने की मांग पर अड़ गए। इस कारण महेन्द्र सिंह रेस से बाहर हो गए। वहीं विधानसभा चुनाव में बाड़मेर से कर्नल सोनाराम की करारी हार टिकट मिलने में बाधक रही। हालांकि बायतु विधानसभा क्षेत्र से कैलाश चौधरी भी तीसरे स्थान पर रहे। इसके बावजूद वे पार्टी हाईकमान का विश्वास जीतने में सफल रहे।

कैलाश के सामने बड़ी चुनौती
तपते रेतीले धोरों में इस बार भाजपा के जाट व कांग्रेस के राजपूत समुदाय से जुड़े प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। कैलाश का यह पहला लोकसभा चुनाव होगा, वहीं मानवेन्द्र यहां से भाजपा प्रत्याशी के रूप में एक बार सांसद रह चुके है और दो बार चुनाव हार चुके है। साथ ही गत लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने पिता जसवंत सिंह के चुनाव प्रचार की बागडोर भी संभाली थी। साथ ही विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव हारने के बाद से मानवेन्द्र पूरी तरह से इस क्षेत्र में सक्रिय हो गए थे और लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क करने में जुटे रहे। ऐसे में देश के दूसरे सबसे बड़े संसदीय क्षेत्र में कैलाश चौधरी के समक्ष बहुत कम समय में सभी मतदाताओं के पास पहुंचने की बड़ी चुनौती होगी।