UP: 8 सीटों में से BJP के 7 सांसदों की प्रतिष्ठा दाव पर

 यूपी. की 8 हाई प्रोफाइल सीटों पर 2014 में भाजपा का कब्जा था लेकिन कैराना सीट उपचुनाव में भाजपा के हाथ से निकल गई थी जिसके चलते इस सीट पर भाजपा ने अपना नया उम्मीदवार मैदान में उतारा है जबकि बाकी 7 सीटों पर भाजपा के सिटिंग सांसद ही चुनावी रण में हैं। इस चुनाव में 96 उम्मीदवार अपना मुकद्दर तलाश कर रहे हैं।  चुनाव आयोग में दाखिल किए गए हलफनामों के मुताबिक केवल बागपत ही ऐसी सीट है जहां पर भाजपा और रालोद के उम्मीदवार के खिलाफ  कोई मुकद्दमा नहीं है जबकि अन्य उम्मीदवारों के हलफनामों के मुताबिक 22 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यू.पी. की 8 सीटों में से 4 पर बसपा, 2 पर सपा और 2 पर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं जबकि कांग्रेस के 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस गठबंधन 2 उम्मीदवारों मुजफ्फरनगर से अजीत चौधरी और बागपत सीट पर जयंत चौधरी की मदद कर रहा है। भाजपा के 8 उम्मीदवारों में से सीटिंग 7 सांसदों की प्रतिष्ठा दाव पर है। अब देखना यह है कि ‘मोदी मैजिक’ इन्हें फिर से कुर्सी पर बिठा देगा या नहीं क्योंकि अन्य दलों के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

कैराना: भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद 2018 में हुए उपचुनाव में उनकी बेटी मृगांका सिंह को टिकट दिया गया था लेकिन वह चुनाव हार गई थीं जबकि 2014 में भाजपा के हुकुम सिंह ने सपा के नाहिद हसन को 2,36,828 वोटों से हराया था। हुकुम सिंह को यहां 5,65,909 वोट तो नाहिद हसन को 3,29,081 वोट मिले थे। प्रदीप सिंह चौधरी इस बार भाजपा, हरेंद्र मलिक कांग्रेस और तबस्सुम हसन सपा प्रत्याशी हैं।

बागपत: 2014 चुनाव में बागपत सीट पर भाजपा के सतपाल सिंह ने 2014 में सपा के गुलाम मुहम्मद को 2,09,866 वोट से हराकर कब्जा जमाया था। सत्यपाल सिंह को यहां 4,23,475 तो गुलाम मुहम्मद को 2,13,609 वोट मिले थे जबकि रालोद सुप्रीमो अजित सिंह को यहां करारी शिकस्त खानी पड़ी थी। भाजपा ने इस बार यहां फिर से सांसद सतपाल सिंह को ही चुनावी रण में उतारा है जबकि गठबंधन के सहयोगी रालोद ने अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी को टिकट दिया है। अजित सिंह की यह परंपरागत सीट रही है। वह इस बार मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ रहे हैं।

गाजियाबाद: पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा सांसद जनरल वी.के. सिंह ने इस सीट पर कांग्रेस के सीनियर नेता राज बब्बर को 5,67,260 वोटों के भारी अंतर से हराया था। भाजपा ने वी.के. सिंह को यहां से फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। सपा ने सुरेश बंसल और कांग्रेस ने डॉली शर्मा को टिकट दिया है। इस बार यहां मुकाबला संघर्षपूर्ण एवं दिलचस्प माना जा रहा है।

गौतमबुद्ध नगर: 2014 में यह सीट भी भाजपा ने सपा से छीन ली थी। भाजपा के डॉ. महेश शर्मा ने सपा के नरेश भाटी को 2,80,212 वोट से हराया था। महेश शर्मा को यहां कुल 5,99,702 वोट तो नरेश भाटी को 3,19,490 वोट मिले। यहां की सियासत गुर्जर वोटरों पर निर्भर करती है। भाजपा ने एक बार फिर से मौजूदा सांसद शर्मा पर ही दाव खेला है। बसपा ने सतबीर सिंह और कांग्रेस ने अरविंद सिंह चौहान को सियासी समर में उतारा है।

मुजफ्फरनगर: 2014 में भाजपा के संजीव बलियान ने बसपा के कादिर राणा को लगभग 4,01,150 वोटों से मात दी थी। संजीव बलियान को यहां 6,53,391 वोट तो कादिर राणा को 2,52,241 वोट मिले थे। भाजपा ने जहां एक बार फिर से बलियान को ही टिकट दिया है, वहीं गठबंधन में शामिल रालोद सुप्रीमो अजित सिंह ने इस बार यहां से चुनाव लडऩे का निर्णय लिया है।

बिजनौर: 2014 में भाजपा के भारतेंद्र सिंह ने गुर्जर समाज के वोटरों के दम पर सपा के शाहनवाज राणा को 205774 वोटों से हराया था। यहां भाजपा के भारतेंद्र सिंह को करीब 486913 वोट मिले थे तो वहीं सपा के शाहनवाज राणा को 281139 वोट मिले। भाजपा ने मौजूदा सांसद पर फिर से भरोसा जताया है। कांग्रेस ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बसपा ने मलूक नागर को टिकट दिया है।

मेरठ: वैश्य समुदाय वाले इस सीट पर 2014 में भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल ने बसपा के मोहम्मद शाहिद अख्तर को लगभग 232326 वोट से हराया था। भाजपा को यहां कुल 532982 वोट तो बसपा को 300655 वोट मिले। भाजपा ने जहां इस बार भी मौजूदा सांसद पर भरोसा जताया है तो वहीं कांग्रेस ने हरेंद्र अग्रवाल और बसपा ने हाजी याकुब कुरैशी को टिकट दिया है।

सहारनपुर: भाजपा के राघव लखनपाल ने 2014 में कांग्रेस के इमरान मसूद को करीब 65090 वोट से हराया था। इमरान मसूद के 407909 वोट के मुकाबले राघव लखनपाल को कुल 472999 वोट मिले थे। भाजपा ने इस बार भी अपने मौजूदा सांसद राघव लखनपाल को ही टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने यहां से दोबारा इमरान मसूद को मैदान में उतार दिया है। इमरान मसूद अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान ने नरेंद्र मोदी को ‘बोटी-बोटी काटने’ की बात कही थी। सपा और बसपा ने इस बार मिलकर चुनाव लडऩे का फैसला लिया है। गठबंधन ने सहारनपुर सीट पर हाजी फजलुर्रहमान को टिकट दिया है।