आडवाणी के नेतृत्‍व वाली समिति ने 4 साल में नहीं बुलाई एक भी बैठक, राहुल पर लगे आरोपों पर चुप

नई दिल्लीः भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता वाली संसद की आचार समिति लगभग पूरे साल निष्क्रिय ही बनी रही। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यूके की नागरिकता के विवादास्पद मुद्दे के बाद भी समिति की चार साल में एक बार भी बैठक नहीं हुई है। इससे पहले समिति के पास एक और राजनीतिक रूप संवेदनशील मुद्दा नारद स्टिंग का सौंपा गया था जिसमें कांग्रेस के पांच सांसदों के खिलाफ सीपीआई (एम) की शिकायत थी लेकिन इसपर भी विचार नहीं किया गया। इसके अलावा लोकसभा सांसदों के लिए आचार संहिता का मुद्दा भी कमिटी के पास लंबित है।

समिति के एक सदस्य ने कहा कि इन मुद्दों को समिति को सौंपे जाने के बावजूद न तो इन पर कभी चर्चा हुई और न ही आडवाणी ने कभी इस पर बैठक बुलाई। लोकसभा की वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक समिति की आखिरी बैठक 3 दिसंबर 2015 को हुई थी। इस संबंध में लोकसभा के सचिव, लोकसभा स्पीकर और आडवाणी से जवाब मांगा गया था लेकिन उन लोगों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

राहुल की नगारिकता पर नहीं किया विचार
साल 2015 में सुब्रह्मणयम स्वामी ने राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता होने का आरोप लगाते हुए पीएम को पत्र लिखा था। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2015 में एक जनहित याचिका खारिज कर दी थी। जनवरी 2016 में भाजपा सांसद महेश गिरी ने राहुल गांधी के मुद्दे को लोकसभा में उठाया था और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इस मामले को आचार समिति को भेज दिया था। समिति ने इस संबंध में राहुल गांधी को मार्च 2016 में नोटिस भेजा था। इस मामले के बाद भी स्पीकर ने तृणमूल सांसद से जुड़े एक और मामले को मार्च 2016 में समिति के पास भेजा दिया था। समिति के कुछ सदस्यों ने बताया कि इन मुद्दों पर कभी चर्चा ही नहीं हुई। बीजद के सांसद बी. मेहताब ने बताया कि राहुल के मुद्दे पर आगे कभी चर्चा नहीं हुई।