राजशाही ठाठबाट से निकली गणगौर माता की सवारी

मीनाक्षी पारीक 

जयपुर. जब परंपराएं भविष्य में झांकती हैं तो समृद्धि उस शहर के कदम चूमती है। …यह तस्वीर है हमारे जयपुर की विरासत और नए विकास के मेल की। 139 साल से सिटी पैलेस से एक ही परिधान रत्नजड़ित लाल सूती पोशाक में निकल रही है गणगौर माता की शाही सवारी। सोमवार को जब निर्माणाधीन मेट्रो के बगल से यात्रा निकली तो एक मेल हुआ हमारे शहर की विरासत और विकास की ओर बढ़ रहे आज के जयपुर का।

लोक कलाकारों ने बिखेरे राजस्थानी रंग
शोभायात्रा में पारंपरिक तोप धारक वाहन, सजे हुए रथ, सजे-धजे घोड़े और ऊंटों का लवाजमा शामिल था। गणगौर की सवारी के अंत में ढाल धारी चोबदार और पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं चल रही थीं। राजस्थानी परंपरागत नृत्य और कच्छी घोड़ी, कालबेलिया नृत्य बहरूपिया कला, गेर और चकरी सहित अन्य मनोरंजक कार्यक्रम स्थानीय श्रद्धालुओं और देशी-विदेशी पावणों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। लोक कलाकारों ने अपनी कला से सभी का मनमोह लिया।

आज निकलेगी बूढ़ी गणगौर की सवारी
परंपरागत रूप से निकलने वाली बूढ़ी गणगौर की सवारी मंगलवार शाम 6 बजे सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी से गाजेबाजे के साथ निकलेगी। यहां से सवारी त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार से होती हुई चौगान स्टेडियम और फिर ताल कटोरा पहुंचकर संपन्न होगी।